मथुरा। शासन की जांच के विपरीत शासनादेश हाईकोर्ट मेें दाखिल करने के आरोप मेें घिरे १३ फार्मेसी विद्यालयों को अब समाज कल्याण विभाग बचाने में जुटा है। उनके खिलाफ चार माह पूर्व एफआईआर के आदेश होने के बाद भी रिपोर्ट नहीं हो सकी है। माना जा रहा है कि यह आदेश विभागीय बाबुओं की मिलीभगत से आगे नहीं बढ़ सका। जबकि वर्तमान कार्यकारी समाज कल्याण विभाग के अधिकारी इस पर अनभिज्ञता जता रहे हैं।
दरअसल, शासन द्वारा अन्य विद्यालयों के साथ-साथ जनपद के करीब ३२ फार्मेसी विद्यालयोें के खिलाफ जांच होनी थी, लेकिन इस जांच के दौरान ही फरह स्थित एक फार्मेसी कॉलेज संचालक द्वारा समाज कल्याण निदेशालय का पत्र की जानकारी दी गई। यह जांच फार्मेसी विद्यालयों के खिलाफ नहीं होने की बात थी। इतना ही नहीं इस शासनादेश को लेकर उक्त १३ फार्मेसी विद्यालय संचालकों द्वारा हाईकोर्ट में एक रिट दाखिल की गई, जिसमें शासनादेश की प्रति भी लगाई गई।
हाईकोर्ट ने जब उक्त शासन के पत्र के संबंध में समाज कल्याण निदेशालय से पूछा गया तो समाज कल्याण निदेशालय ने इस प्रकार का शासनादेश जारी करने से मना कर दिया। हाईकोर्ट ने कोर्ट में फर्जी पत्र लगाने के आरोप में १३ फार्मेसी विद्यालयों के खिलाफ एफआईआर के आदेश किए। यह आदेश शासन द्वारा मथुरा समाज कल्याण अधिकारी के पास अक्तूबर २०२१ में ही भेज दिए।
तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी ने इन सभी विद्यालयों के खिलाफ एफआईआर के आदेश भी कर दिए, लेकिन अभी तक इन विद्यालयों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी। वर्तमान कार्यकारी समाज कल्याण अधिकारी व जिला अल्पसंख्यक अधिकारी महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उनके संज्ञान मेें इस प्रकार का कोई आदेश नहीं है।