शुक्रवार को डूडा कार्यालय पर सामाजिक दूरी के बिना खड़े लोग।
- फोटो : MATHURA
मथुरा। प्रधानमंत्री आवास के लिए पात्रों को योजना की धनराशि देने के नाम पर रिश्वत लेने का मामला काफी समय से चर्चा में है। बिल्डरों से मिलीभगत कर खादर की जमीन पर बने अवैध मकानों के लिए भी योजना की धनराशि जारी करने का मामला अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। पिछले दिनों महापौर मुकेश आर्यबंधु ने नगर विकास मंत्री से डूडा कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार की शिकायत की थी। महापौर का आरोप है कि भ्रष्टाचार की जानकारी परियोजना अधिकारी रमेश चंद्र कौशिक को दी है लेकिन वह सुनवाई नहीं कर रहे। इस शिकायत पर नगर विकास राज्यमंत्री महेश चंद्र गुप्ता ने विभाग के सचिव को जांच कर दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
जनहित की कई योजनाओं का संचालन डूडा कार्यालय से होता है। प्रधानमंत्री आवास, ठेल-ढकेल वालों के लिए लोन, शौचालय निर्माण के लिए लोगों की भीड़ कार्यालय पर लगी रहती है। योजनाओं का लाभ देने के नाम पर डूडा के कर्मचारियों पर रिश्वत मांगने के आरोप लोग लगाते रहे हैं। इसी मामले में महापौर मुकेश आर्यबंधु ने नगर विकास मंत्री शिकायती पत्र भेजा था, जिसमें कहा था कि जरूरतमंदों को प्रधानमंत्री आवास का लाभ देना सरकार की प्राथमिकता है, लेकिन डूडा के कर्मचारी किश्त की धनराशि देने के नाम पर रिश्वत मांग रहे हैं।
जिन लोगों के पास गाड़ी, मकान आदि सुविधाएं हैं उन्हें गरीबों की योजना की धनराशि दी जा रही है। महापौर का आरोप है कि उन्होंने डूडा कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार की जानकारी परियोजना अधिकारी रमेश चंद्र कौशिक को दी, लेकिन उन्होंने इस पर काई ध्यान नहीं दिया।
डूडा कार्यालय में भ्रष्टाचार चरम पर है। 25 फीसदी धनराशि लेकर ही योजनाओं का लाभ लोगों को मिल रहा है। शिकायत के बाद भी परियोजना अधिकारी सुनवाई नहीं कर रहे। शासन स्तर से जांच होनी चाहिए और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
- मुकेश आर्यबंधु, महापौर
कुछ लोग गलत काम कराना चाहते थे, जिसका विरोध किया। तो फर्जी शिकायतें की जा रही हैं। कार्यालय में भ्रष्टाचार के आरोप बेबुनियाद हैं।
-रमेश चंद्र कौशिक, परियोजना अधिकारी।