वृंदावन (मथुरा)। बसपा भी शुक्रवार को संतों के सानिध्य में पहुंची। राष्ट्रीय महासचिव सतीशचंद्र मिश्रा ने राधा निवास स्थित श्याम श्याम आश्रम में एक हजार संतों और धर्माचार्यों का सम्मान कर भोज कराया। उन्होंने स्वयं संतों को भोजन परोसा और आशीर्वाद लिया। उन्होंने संतों के सम्मान को गैर राजनीतिक बताया। दावा किया कि वृंदावन के विकास के लिए मायावती सरकार ने ३०० करोड़ रुपये दिए थे। दावा किया कि प्रदेश में अगली सरकार बसपा की ही बनेगी। कार्यक्रम आयोजक मांट से बसपा विधायक पंडित श्याम सुंदर शर्मा ने कहा कि उनकी सरकार आई तो संत सुरक्षा आयोग का गठन कराएंगे।
मंच से संबोधन में सतीश चंद्र ने कहा कि हम यहां कोई राजनीति की बात करने के लिए नहीं आए हैं। अगर राजनीति करनी होती तो लोगों को बुलाते और बैठक करते। यहां हम गैर राजनीति के उद्देश्य से संतों की शरण और श्रीबांकेबिहारी के दर्शन के लिए आए हैं। यह पहला मौका नहीं है कि अब हम वृंदावन संतों के पास आए, बचपन से वृंदावन से हमारा नाता रहा है। बताया कि 2006 में सरकार में आने के बाद बसपा मुखिया बहन मायावती ने वृंदावन के समग्र विकास के लिए तीन सौ करोड़ की योजना दी। आज जो यहां विकास दिख रहा है, वह बसपा की देन है।
बसपा महासचिव ने मथुरा-वृंदावन और अयोध्या के लिए किए गए अपने कार्यों को गिनाया। उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि कुछ लोग केवल राम का नाम लेते हैं। सीताराम कहने में उन्हें डर लगता है। जबकि राम सीता के बिना अधूरे हैं। उनकी सरकार ने केवल मथुरा अयोध्या ही नहीं बल्कि जहां सीता मां रहीं उस बिठूर में भी करोड़ों रुपये के विकास कार्य कराए थे। दावा किया कि उनकी सरकार 2007 में जितनी सीटों पर जीत कर आई थी। इस बार उससे भी ज्यादा सीटों पर जीत कर प्रदेश में सरकार बनाएगी।
मांट क्षेत्र के विधायक पंडित श्याम सुंदर शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि संतों का आशीर्वाद रहा तो हम फिर से प्रदेश की सत्ता में आएंगे। ललित शर्मा ने कार्यक्रम आयोजन में महती भूमिका निभाई। इस मौके पर महामंडलेश्वर बालयोगेश्वरानंद, राघवेंद्र बाबा, पुरुषोत्तमाचार्य, डॉ. गोपाल चतुर्वेदी, रमेशदत्त गौड़, पूर्व मंत्री नकुल दुबे, फरीदाबाद के विधायक टेकचंद, डॉ. मनोज मोहन शास्त्री, श्रीकृष्ण शास्त्री, मोहिनी बिहारी शरण आदि ने सतीशचंद्र मिश्रा का स्वागत किया।
कृषि कानूनों की वापसी चुनावी स्टंट: सतीश मिश्रा
सतीश ने कृषि कानूनों की वापसी पर सरकार की नीयत पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कृषि कानूनों की वापसी को चुनावी स्टंट करार दिया। कहा कि कृषि कानूनों की वापसी को लेकर 800 से 900 किसानों ने अपनी जान गवां दी। उस समय सरकार ने कानूनों को वापस क्यों नहीं लिया। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि हो सकता है कि केवल चुनाव के 4 महीने के लिए ही ये कानून वापस लिए गए हों। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों को सरकार उचित मुआवजा दे।
कुछ न कहकर भी पलटवार कर गए सतीश
दरअसल, पिछले दिनों सीएम योगी ने ब्रज रज उत्सव (१० नवंबर) के शुभारंभ पर वृंदावन में आकर ५०० संतों को भोजन व सम्मान किया था। शुक्रवार को मेला का समापन था। सतीश मिश्रा ने यहां आकर एक हजार संतों के साथ भोजन कर उनका सम्मान किया। वह यह भी कह गए कि यह राजनीतिक नहीं है लेकिन इस कार्यक्रम का संदेश यही है कि भाजपा यह न समझे कि वह संतों का समर्थन ले लेंगे। संतों का भरोसा तो बसपा पर है। आगामी विधानसभा चुनाव में बसपा पहले ही कह चुकी है कि वह सभी जातियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे।