वृंदावन (मथुरा)। प्रभु के श्री चरणों की प्राप्ति वास्तव में मोक्ष से भी कोटि गुना अधिक उत्तम है। यह उद्गार वंशीवट स्थित श्री मलूक पीठ सेवा संस्थान न्यास में द्वाराचार्य जगद्गुरू श्री मलूकदास महाराज के 448वें अष्ट दिवसीय जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरू स्वामी राम भद्राचार्य ने भगवान श्री राम और ताड़का के बीच हुए संवाद पर व्यक्त किए।
उन्होंने भगवान राम ने ताड़का का वध करने से पूर्व उससे पूछा कि तुम्हें मोझ प्रदान करना चाहता हूं, इस पर ताड़का ने प्रभु श्री राम से विनती करते हुए कहा कि यदि आप मुझ दीन को कुछ प्रदान करना ही चाहते हैं, तो मुझे अपने श्री चरणों की प्राप्ति प्रदान कीजिए, क्योंकि आपके श्री चरणों की प्राप्ति तो देवताओं एवं ऋषियों के लिए भी असंभव है।
उन्होंने प्रभु श्री राम द्वारा राक्षसों के वध अर्थात हंता शब्द का भी काफी व्यापक रूप से वर्णन करते हुए कहा कि हंता शब्द के अर्थ में हिंसा का भान होता है, जबकि प्रभु श्री राम ने हिंसा की ही नहीं। उन्होंने हंता शब्द का अभिप्राय गति प्रदान करने से जोड़ते हुए कहा कि गति चार प्रकार की बताई गईं हैं, जिसमें से एक प्रकार मोक्ष प्रदान करना भी है। इसीलिए भगवान ने राक्षसों पर हिंसा नहीं, अपितु करूणा प्रदान कर उन्हें मोक्ष प्रदान करने का कार्य किया था।
इससे पूर्व कथा व्यास श्याम सुंदर पाराशर, पीपा पीठाधीश्वर बलरामदास देवाचार्य, विद्वान बसंत शास्त्री, आचार्य पीठ के यदुनंदन आचार्य, मोतीझील आश्रम के श्रीमहंत स्वामी जगदानंद महाराज, श्रीगोरीलाल कुंज के महंत श्रीकिशोरदास देवजू महाराज, आचार्य रामविलास चतुर्वेदी, राधावल्लभ जी के अन्यन्योपासक संत रसिक माधव दास एवं गोवर्धन के विधायक ठा मेघश्याम ने पद्म विभूषण जगद्गुरू स्वामी रामभद्राचार्य महाराज का अभिवादन किया।
भक्तों ने लिया रासलीला आनंद
मलूकदास जयंती के उपलक्ष्य में बाल व्यास राधाकृष्ण ने अपने साथियों के साथ प्रभु श्री मलूक विहारी एवं विहारिणी के पदों का मनमोहन प्रस्तुतिकरण किया गया। वहीं रासाचार्य कुंजबिहारी शर्मा के निर्देशन में रासलीला का भी भक्तों ने पूर्ण भाव से आनंद रसपान किया। इस अवसर पर गोपेश कृष्ण दास, गंगा दास महाराज, रसराज, प्रवीण एवं मलूक पीठ के प्रवक्ता देव द्विवेदी आदि उपस्थित थे।