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अमर उजाला शिक्षा अभियान : कोविड के दो साल ने बदल दिया शिक्षा व्यवस्था का ढर्रा, ऑफलाइन पढ़ाई में भी घट गई छात्र-छात्राओं की संख्या

Fri, 25 Mar 2022 03:30 PM IST
सुशील कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा 

सार

कोविड के चलते दो साल सर्वाधिक चुनौतियों का सामना शिक्षा व्यवस्था ने किया है। इंटरमीडिएट तक की शिक्षण संस्थाओं की बात करें तो इन दो सालों में सबसे अधिक चुनौतियां यहां रही हैं। इन चुनौतियों का सामान अभिभावकों ने आर्थिक तंगी के रूप में किया है।
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अमर उजाला शिक्षा अभियान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोविड के दो साल ने शिक्षा व्यवस्था का ढर्रा ही बदल दिया है। दो साल तक ऑनलाइन पढ़ाई के बाद एक बार फिर शुरू हुई ऑफलाइन में अनेक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। छात्र-छात्राओं का मन अब भी पढ़ने में नहीं लग रहा है तो परिस्थितियों के चलते अनेक विद्यार्थी आज भी विद्यालय नहीं आ रहे हैं। अनेक ने अपने विद्यालय बदल दिए हैं।

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कोविड के चलते दो साल सर्वाधिक चुनौतियों का सामना शिक्षा व्यवस्था ने किया है। इंटरमीडिएट तक की शिक्षण संस्थाओं की बात करें तो इन दो सालों में सबसे अधिक चुनौतियां यहां रही हैं। इन चुनौतियों का सामान अभिभावकों ने आर्थिक तंगी के रूप में किया है। रोजगार संकट के दौर में कभी मोबाइल और इंटरनेट सेवा बच्चों को उपलब्ध कराना अतिरिक्त बोझ बना तो कभी शिक्षण शुल्क के अभाव में विद्यालयों को बदलना मजबूरी बन गया। 

इन कारणों से ऑनलाइन और फिर ऑफलाइन शिक्षा में छात्र-छात्राओं की संख्या तक घट गई। इतना ही नहीं दो साल घर पर रहने वाले बच्चे अब क्लास में पढ़ाई से मन चुराने लगे हैं। इस चुनौती से शिक्षकों को अब गुजरना पड़ रहा है।
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कोविड के दौरान दो साल में शिक्षा व्यवस्था सबसे अधिक प्रभावित हुई है। ऑनलाइन क्लास में पंजीकरण के सापेक्ष 25 प्रतिशत की कमी आई थी तो अब भी 10 प्रतिशत बच्चे अनेक कारणों से स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं। इसमें अभिभावकों के समक्ष आर्थिक तंगी, फीस का अभाव भी शामिल है। ऑनलाइन क्लास कोई विकल्प नहीं था। - पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया, संस्थापक, ज्ञानदीप विद्यालय

दो साल कोविड के चलते प्रभावित हुई शिक्षा को पटरी पर लाने में वक्त लगेगा। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की संख्या घट गई है। फीस को लेकर सर्वाधिक विवाद की स्थिति रही। विद्यालयों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा है। अभिभावकों पर भी ऑनलाइन पढ़ाई में मोबाइल आदि का अतिरिक्त बोझ पड़ा। - लता गोयल, डायरेक्टर, रमनलाल शोरावाला पब्लिक स्कूल

बच्चों का मन पढ़ाई से उझट गया है। उनकी क्लास में पढ़ने की आदत खत्म हो गई है। इससे बहुत समस्या बच्चों को पढ़ाने में आ रही है। मोबाइल से पढ़ने की आदत ने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। किसी भी प्रश्न को पूछने पर अब छात्र-छात्राएं गूगल का सहारा लेने लग गए हैं। -राकेश चतुर्वेदी, शिक्षक श्रीजी बाबा सरस्वती विद्या मंदिर

कोविड के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई में दिक्कतें खड़ी हुईं। प्रत्येक बच्चे को ऑनलाइन पढ़ाना बेहद कठिन रहा। कोई अभिभावक सहयोगी बने तो कुछ नहीं बन सके। अब ऑफलाइन क्लास शुरू हो गई हैं तो फिर दो साल में बदली आदत के चलते बच्चों को पुराने पैटर्न पर लाना कठिन हो रहा है। कोर्स पूरा करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ रहे हैं। - प्रीति पांडेय, शिक्षक, रतनलाल फूल कटोरी बालिका विद्यालय

कोविड में सबसे ज्यादा परेशानी अभिभावकों को हुई है। विद्यालयों का रुख सहयोगात्मक नहीं रहा। ऑनलाइन क्लास में मोबाइल, इंटरनेट आदि अतिरिक्त बोझ के साथ घर बैठे बच्चों की पूरी फीस देनी पड़ी है। दो या फिर इससे अधिक बच्चों एक परिवार में होने पर सभी एक साथ ऑनलाइन क्लास नहीं ले सके। एक परिवार में सभी बच्चों के लिए मोबाइल उपलब्ध नहीं थे। फीस फिर भी ली गई। - अशोक सिंह एडवोकेट, अभिभावक

बहुत चिंताजनक स्थितियों से अभिभावक बच्चों की पढ़ाई को लेकर कोविड और उसके बाद गुजरे हैं। आर्थिक तंगी सभी के लिए इस दौरान सबसे गंभीर समस्या रही है। इसके बावजूद शिक्षण कार्य से अधिकांश अभिभावक संतुष्ठ नहीं रहे। - गोविंद सिंह, अभिभावक

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