वन और वन्य जंतुओं से समृद्ध इस जिले में जंगली जानवर हिंसक होते जा रहे हैं।
भीरा रेंज के पड़रिया बीट के डिम्रौल गांव में बाघ ने 35 साल के छैलबिहारी को निवाला बना लिया जबकि नेपाल सीमा पर चौगुर्जी गांव में हाथियों के झुंड ने 22 साल के मनोहर को पटक-पटक कर मार डाला।
खेत में छिपे बाघ को भगाने के लिए ग्रामीणों ने खेतों में आग लगाई दी। लोगों के शोर से बाघ भागते हुए सिमरिया गांव की ओर चला गया, जहां उसने बलजिंदर सिंह नाम के व्यक्ति पर हमला बोलकर उसे जख्मी कर दिया।
लोगों में मौत से गुस्सा
इन घटनाओं से गुस्साए ग्रामीणों ने हंगामा कर वन्य जंतुओं से सुरक्षा करने की मांग की है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने छैलबिहारी के परिवारीजनों को 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी है।
भीरा रेंज के पड़रिया बीट के डिम्रौल गांव निवासी छैलबिहारी बृहस्पतिवार देर शाम शौच के लिए गया था लेकिन वह लौटकर नहीं आया। खोजबीन में लगे परिवार वालों को शुक्रवार की सुबह एक खेत में उसके खून से सने कपड़े मिले।
सूचना मिलने पर पुलिस और जंगलात के कर्मचारी गांव पहुंचे। ग्रामीणों के साथ दो ट्रैक्टरों पर सवार होकर वे छैलबिहारी की तलाश में गन्ने के खेतों में घुसे। एक खेत में छैलबिहारी का अध खाया शव पड़ा मिला।
हाथियों का झुंड हुआ बेकाबू
इससे गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग पर बाघ को पकड़ने का दबाव बनाते हुए गन्ने के चार खेतों में आग लगा दी।
यहां से भागा बाघ सिमरिया गांव जा पहुंचा और उसने 40 वर्षीय बलजिंदर पर हमला बोल दिया। बलजिंदर के बाजू पर बाघ के दांत और जांघ पर पंजों के जख्म हैं।
खेतों में आग लगाने की जानकारी मिलने पर डीएफओ नीरज यादव, एसडीएम गोला एसपी सिंह, सीओ टीपी सिंह, सीओ पलिया रामआसरे सहित पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गया। उन्होंने बमुश्किल ग्रामीणों को समझाकर शांत किया।
इस बीच भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में आतंक मचाए हाथियों के झुंड ने गुरुवार की शाम शौच के लिए गए चौगुर्जी गांव के मनोहर नामक युवक को पटक-पटक कर मार डाला।
हमले के दौरान मनोहर की कमर में हाथी का दांत घुस गया। रीढ़ की हड्डी के अलावा दाएं पैर और हाथ की हड्डी भी टूट गई। ग्रामीणों ने बड़ी मशक्कत से हाथियों को भगाया। वन विभाग के रवैये से गुस्साए लोगों ने जमकर हंगामा काटा।
महज हादसा, मैनईटर नहीं बाघ
दुधवा नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर वीके सिंह के अनुसार छैलबिहारी को निवाला बनाने वाला बाघ मैनईटर नहीं हुआ है।
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथारिटी की गाइड लाइन के अनुसार बाघ के हमले की पहली घटना एक्सीडेंट, दूसरी और तीसरी भी आकस्मिक मानी जाती है।
इसके बाद कोई घटना होने पर भी उन स्थितियों पर विचार किया जाता है, जिनमें बाघ ने हमला किया है। उसके बाद ही उसको नरभक्षी घोषित करने अथवा न करने का निर्णय लिया जाता है। नरभक्षी घोषित होने के बाद भी बाघ को मारने की बजाय ट्रैंकुलाइज कर कैद करने को प्राथमिकता दी जाती है।