फोटो 32 बीएसए कार्यालय पर धरने पर बैठे शिक्षक-शिक्षिकाएं। संवाद
मैनपुरी। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने की तिथि से पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता से प्रदेश के शिक्षक- शिक्षिकाओं में आक्रोश है। आक्रोशित शिक्षक पिछले चार दिन से आंदोलन रत हैं। आंदोलन के तीसरे चरण में बृहस्पतिवार को टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले जिले के शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय पर प्रदर्शन किया। बीएसए कार्यालय से कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन राजस्व अधिकारी को सौंपा।
बीएसए कार्यालय पर प्राथमिक शिक्षक संघ, जिला महिला शिक्षक संघ और पूर्व माध्यमक शिक्षक संघ के पदाधिकारी और सदस्य टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले एकत्रित हुए। यहां धरना देते हुए जमकर प्रदर्शन किया। यहां से पैदल और बाइकों पर सवार होकर शिक्षक नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। कलेक्ट्रेट पहुंचकर राजस्व अधिकारी ध्रुव शुक्ला को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि उत्तर प्रदेश राज्य में शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 27 जुलाई, 2011 से लागू किया गया है। अधिनियम के अनुसार अधिनियम के प्रभावी होने की तिथि से अथवा उसके बाद नियुक्त पाने वाले शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण होना अनिवार्य किया गया है। जबकि उसके पूर्व में नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त रखा गया है।
शिक्षक नेताओं ने ज्ञापन में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के एक सितंबर 2025 के निर्णय के द्वारा देश के सभी राज्यों में अधिनियम लागू होने की तिथि से पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को भी सेवा में बने रहने अथवा पदोन्नति के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। जोकि पूर्व में नियुक्त शिक्षकों के साथ सरासर अन्याय है। फलस्वरूप देश भर के शिक्षक टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले आंदोलनरत हैं। मांग की कि सरकार अध्यादेश लाकर आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट दिलाई जाए।
ज्ञापन देने वालों में अरुण यादव, प्रिया चौहान, गोविंद पांडेय, रामपाल सिंह, राजकिशोर सिंह, सुभाष कश्यप, मनोज कश्यप, मुकेश यादव,जितेंद्र वर्मा, राजीव मिश्रा, सरिता यादव, प्रसून पांडेय, सर्वेश यादव आदि मौजूद रहे।