मैनपुरी सदर विधानसभा में प्रत्याशी मतदाताओं का मूड़ नहीं भांप पाए। जातीय समीकरणों के आधार पर बैठाया गणित मतदान के दिन फेल होता नजर आया। यहां सपा से विधायक राजकुमार यादव, भाजपा से पूर्व विधायक अशोक चौहान और बसपा से महाराज सिंह शाक्य चुनाव मैदान में हैं। इस बार सपा के गढ़ में यादवों के साथ ही मुस्लिम वोटर भी बंट गए। चुनाव के दिन कुछ अलग ही रुख मतदाताओं का नजर आया। मैनपुरी में पिछली बार यादव और मुसलमान वोट एक मुश्त समाजवादी पार्टी की झोली में गया था। इसका परिणाम यह हुआ था कि सपा प्रत्याशी ने इकतरफा जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार पूरा परिदृश्य ही बदला हुआ है। पार्टी के दो धड़ों में बंटने से यादव वोट भी बंट गया है। मुस्लिमों में बसपा ने सेंधमारी की। बसपा ने सपा के और भाजपा ने पिछली बार जो वोट बसपा को मिला था, उसमें सेंध लगाई। सपा के वोट बैंक बंटने का लाभ अन्य पार्टियों को मिलता दिख रहा है और सपा की सीट बरकरार रखने चुनौती और कड़ी हो गई। पिछले पांच चुनावों के मुकाबले मतदान प्रतिशत भी अधिक रहा। ऐसे में चुनाव से पहले लगाए अनुमान और गणित धरे गए।
विधानसभा भोगांव
सीधे मुकाबले की तस्वीर, रोचक हुआ मुकाबला
मैनपुरी। इस विधानसभा पर सपा और भाजपा में सीधी टक्कर होती नजर आई है और मुकाबला काफी रोचक हो गया। इस सीट पर पिछली तीन बार से सपा के टिकट पर चुनाव जीत रहे विधायक आलोक शाक्य चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने भाजपा के रामनरेश अग्निहोत्री और बसपा के सुरेंद्र यादव चुनाव मैदान में है। इस विधानसभा में सर्वाधिक लोधी वोट हैं। उसके बाद नंबर शाक्य और यादव मतदाता है। सपा ने तीन बार के विजेता आलोक शाक्य को टिकट दिया। वहीं बसपा ने सपा कुनबे में फैली रार को देखते हुए यहां से यादव प्रत्याशी पर दांव खेला। भाजपा ने ब्राह्मण प्रत्याशी को उतारा। उनके पक्ष में माहौल बनाने के लिए भाजपा ने हर वर्ग और जाति के राष्ट्रीय नेताओं की ताबड़तोड़ सभाएं कराई। मतदान के दिन इसका असर भी भाजपा को मिलता दिखा। पार्टियों के परंपरागत वोट बैंक में बिखराव हुआ तो प्रत्याशियों के समीकरण गड़बड़ा गए। सपा और भाजपा में सीधे मुकाबले की तस्वीर यहां बनती नजर आई।
किशनी विधासनभा
मुद्दा विकास, कोई घर बैठा
तो किसी ने वोट से की चोट
मैनपुरी। किशनी विधानसभा में त्रिकोणीय संघर्ष के चलते जंग रोचक हो गई है। यहां पर सपा से ब्रजेश कठेरिया, बसपा से कमलेश कुमारी और भाजपा से सुनील जाटव मैदान में हैं। मतदान के दिन यहां विकास का मुद्दा प्रभावी दिखा। कई गांवों में लोगों ने मतदान का बहिष्कार किया तो अधिकांश जगह पर लोगों ने वोट से चोट की। ऐसे में बसपा प्रत्याशी को दलित और मुस्लिम समीकरण से आस है तो सपा प्रत्याशी को सपा को भी पार्टी के परंपरागत वोटरों और मुस्लिम मतों के सहारे जीत की उम्मीद है। मुस्लिम वोटों के बंटवारे ने इनके समीकरणों को काफी उलझा दिया है। भाजपा प्रत्याशी पार्टी के परंपरागत वोट, ठाकुर वोट और पिछड़ों के वोट मिलने के भरोसे जीत का दम भर रहे हैं। पिछड़े इलाके के तौर पर गिने जाने वाले इस क्षेत्र में विकास मुद्दे पर मतदाताओं का भरोसा किस प्रत्याशी को मिला, यह निर्णय रविवार को ईवीएम में बंद हो गया।
कड़े मुकाबले में उलझे समीकरण
करहल विधानसभा
मैनपुरी। करहल विधानसभा पर सपा ने इस बार भी पिछली तीन बार चुनाव जीत रहे विधायक सोबरन सिंह पर दांव खेला है। भाजपा ने रमा शाक्य तो बसपा ने दलबीर पाल पर दांव खेला। इस सीट पर कुल मतदाताओं में चालीस प्रतिशत 40 प्रतिशत यादव मतदाता है। दूसरे स्थान पर शाक्य मतदाता है। वोटों का बिखराव इस सीट पर नजर आया तो विकास के मुद्दे पर मतदाताओं में नाराजगी भी रही। कुछ मतदाता जातीय आधार पर वोट करते नजर आए तो कुछ विकास के मुद्दे पर नाराजगी जताते। जातीय समीकरणों के आधार किए जा रहे प्रत्याशियों के दावे चुनाव के दिन फेल होते नजर आए।