महोबा। प्रांत के बाहर बसों के संचालन पर रोक के चलते जिले की सरहद पर बसे मध्यप्रदेश में बसों का आवागमन ठप होने से लोग जिला मुख्यालय से दस से बीस किमी आवागमन नहीं कर पा रहे हैं। इससे सरहद पर बसे मध्यप्रदेश के बाशिंदों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय से मध्य प्रदेश जाने वाली बसों के संचालन पर रोक से जिले के तमाम गांव में भी लोग नहीं पहुंच पा रहे हैं।
गौरतलब है कि जिला मुख्यालय से पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के खजुराहो, छतरपुर, सतना, टीकमगढ़, पन्ना सहित विभिन्न जिलों में बसों को संचालन होता है। तीन माह पहले लॉकडाउन के चलते बंद हुई बसों का मध्यप्रदेश के लिए आवागमन आज तक शुरू नहीं हो सका है। मध्यप्रदेश के लिए चलने वाली बसों में जिले के श्रीनगर, कैमाहा, भंडरा, बरा, शाहपहाड़ी, कुम्हड़ौरा सहित तमाम कस्बे और गांव के यात्री यात्रा करते हैं, पर अब दिक्कत है। लॉकडाउन के बाद प्रदेश से बाहर बसों के संचालन पर हरी झंडी न मिलने के कारण करोड़ों रुपयों लागत की बसें तीन माह से बस स्टैंड पर खड़ी हैं। इससे बस मालिकों को भी भारी नुकसान हो रहा है। परमिट की फीस तो ली जा रही है, लेकिन बसें नहीं चल रही हैं।
बसें न चलने से 500 प्राईवेट कर्मचारी बेकार
महोबा। एमपी में बसों की आवाजाही पर रोक लगने से पांच सैकड़ा से ज्यादा बसों में काम करने वाले चालकों, परिचालकों को वेतन नहीं मिल पा रहा। बस मालिकों ने भारी घाटे में चलने के कारण अब वर्करों के वेतन पर रोक लगा दी है। जिससे चालक, परिचालक, क्लीनर व हेल्परों के परिवारों के सामने आर्थिक संकट है, जिससे बसों में चलने वाले वर्कर भी अब खासे परेशान हैं।