कुलपहाड़ (महोबा)। मारपीट का झूठा मुकदमा दर्ज कराना वादी को महंगा पड़ गया। न्यायाधीश ने वादी को ही सजा सुना दी। साथ ही चारों प्रतिवादियों को पांच-पांच हजार रुपये एक माह के अंदर प्रतिकर के रूप में अदा करने का आदेश दिया। समयसीमा के अंदर प्रतिकर के रूप में धनराशि अदा न करने पर एक माह की सजा का प्रावधान किया गया है।
मामला कुलपहाड़ तहसील के मुढ़ारी गांव का है। वर्ष 2006 में मुढ़ारी गांव निवासी रमेशचंद्र कुशवाहा ने गांव के ही हीरालाल, रमेश, गयाप्रसाद व राकेश कुमार के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज व जान से मारने की धमकी का मुकदमा दर्ज कराया था। यह मामला सिविल जज जूनियर डिविजन की अदालत में चल रहा था। न्यायाधीश दिव्यकांत राठौर ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद गवाहों व बयानों के आधार पर मुकदमे को झूठा पाया। उन्होंने वादी रमेशचंद्र कुशवाहा को चारों प्रतिवादियों को एक माह के अंदर पांच-पांच हजार रुपये का प्रतिकर अदा करने के आदेश दिए हैं। एक माह में प्रतिकर अदा न करने पर वादी रमेशचन्द्र को एक माह जेल की सजा भुगतनी पड़ेगी। प्रतिवादियों की ओर से मुकदमे की पैरवी अधिवक्ता ताहर सिंह राजपूत ने की।