महोबा। बुंदेलखंड का महोबा जनपद प्रदेश भर में कन्या जन्म दर में सबसे आगे निकल गया है। सीमित संसाधनों के बावजूद जागरूकता के चलते जिले में बालिकाओं की जन्म दर प्रदेश की औसत जन्म दर से भी ज्यादा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) की 2019-21 की जारी रिपोर्ट के मुताबिक यहां बेटियों की औसत जन्म दर प्रति 1000 बालकों के सापेक्ष 1056 है। 2015-16 में हुए सर्वेक्षण में यह औसत 959 था। इसी प्रकार प्रदेश में 1000 बालकों पर बालिकाओं की औसत जन्म दर 1017 पहुंच गई है, पूर्व के सर्वे में यह 995 थी। देश में कन्या जन्म दर का औसत 991 से बढ़कर 1020 हो गया है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा. सुधाकर पांडेय का कहना है कि कन्या जन्म दर बढ़ाने के लिए प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। अब इसके सकारात्मक नतीजे भी सामने आने लगे हैं। जनपद में बालकों की तुलना में बालिका जन्म दर ज्यादा है। एनएफएचएस-4 के आंकड़ों में 1000 बालकों पर 959 बालिकाएं जन्म ले रही थीं। बालकों की तुलना में बालिकाओं के जन्म का प्रतिशत कम रहता था, जबकि अब कन्या जन्म दर बालकों से भी आगे निकल गई है।
सीएमओ का कहना है कि लोगों में जनसंख्या स्थिरीकरण और परिवार नियोजन को लेकर जागरुकता आई है। कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम भी सराहनीय हैं। ‘बेटी है या बेटा’ की जानकारी देने वाले अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर भी सख्ती की गई है। अवैध रूप से गर्भपात कराने वाले स्थानों पर भी प्रशासन ने शिकंजा कसा है। हर सेंटर पर मरीज का फार्म भरवाया जाता है, जिसमें सभी जरूरी जानकारी रहती हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इनकी जांच और इनसे नियमित रिपोर्ट ली जाती है। गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। इसलिए बालक और बालिकाओं के लिंग अनुपात के बीच का अंतर घटा है। बालिकाओं के जन्म में बढ़ोतरी हुई है।
फतेहपुर और औरैया भी आगे
कन्या जन्म दर के मामले में फतेहपुर और औरैया की भी स्थिति बेहतर है। फतेहपुर में 1000 बालकों पर बालिकाओं की औसत जन्म दर 1035 और औरैया में 1021 है।
एनएफएचएस-5 की जारी रिपोर्ट में आसपास के जिलों की स्थिति
जिले का नाम- लिंगानुपात (प्रति हजार बालक पर बालिकाएं)
बांदा - 956 (पूर्व 908)
हमीरपुर - 1003 (पूर्व 945)
जालौन- 937 (पूर्व 928)