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1.30 करोड़ की मशीन हुई बेमतलब मछुआ समाज के लोगों पर तालाब सफाई का जिम्मा

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महोबा। जिले के ऐतिहासिक तालाबों से जलकुंभी साफ करने के लिए पालिका प्रशासन द्वारा 1.30 करोड़ की लागत से मंगाई गई एक्वाटिक ब्रीड हार्वेस्टर मशीन बेमतलब साबित हो रही है। तीन माह पहले मंगाई गई मशीन एक तालाब की 50 फीसदी जलकुंभी भी साफ नहीं कर सकी। अब मछुआ समाज के लोग तालाब की जलकुंभी हटाने का काम कर रहे हैं। ऐतिहासिक मदन सागर में मछुआ समाज के 70 लोग प्रतिदिन जलकुंभी हटाने के कार्य में जुटे हैं।
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जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के निर्देश पर तालाबों को साफ व सुंदर बनाने के लिए पालिका प्रशासन से 1.30 करोड़ रुपये की लागत से दक्षिण भारतीय राज्य केरल से मशीन मंगाई थी। शुरुआती दौर से ही मशीन खराब होने लगी। जिससे कई दिन जलकुंभी साफ करने का अभियान बंद रहा। करीब एक माह पहले ऐतिहासिक मदन सागर की जलकुंभी साफ नहीं हो सकी और पालिका प्रशासन ने मशीन कीरत सागर की जलकुंभी हटाने के लिए भेज दी। जहां यह मशीन शोपीस बनी है। अब मछुआ समाज के लोगों के सहारे जलकुंभी हटाने का काम चल रहा है। जिससे मशीन मंगाने के नाम पर बड़ा खेल होने की चर्चाएं हो रही हैं।
बीते चार दिन से मछुआ समाज के लोग मदन सागर जलकुंभी हटा रहे हैं। प्रतिदिन 70 लोगों के जलकुंभी हटाने से अबतक 140 ट्राली जलकुंभी बाहर निकाली जा चुकी है। मछुआ समाज के रतन, किशोरी, मदन, कल्लू, घनश्याम, कैलाश, मुरलीधर, महेश, बबलू आदि का आरोप है कि नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि सौरभ तिवारी ने तालाब साफ करने की बात कहकर पट्टा दिए जाने का लालच दिया। जिससे समाज के लोग सफाई कर रहे हैं। यदि उन्हें ठेका दिया जाता तो वह चार माह में पूरा तालाब साफ कर देते। समाज के लोग सुबह सात बजे से 10 बजे तक प्रतिदिन सफाई कार्य में जुटे हैं। उन्होंने पालिका प्रशासन से तालाब सफाई कार्य का भुगतान करने की मांग की है।
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उधर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि सौरभ तिवारी का कहना है कि तालाब का पट्टा दिए जाने की मांग को लेकर समाज के लोग डीएम से मिले थे। समाज के लोगों ने तालाब साफ रखने की बात कही थी। आरोप बेबुनियाद हैं।
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