महोबा। कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रॉन की आहट के बाद भी कोरोना की जांच व जागरूकता का अभाव दिख रहा है। रोडवेज बस स्टैंड पर तो कुछ इसी तरह के हालात दिख रहे हैं। यहां से हजारों की संख्या में यात्रियों का आना जाना है, लेकिन जांच गिनती के लोगों की हो रही है। रोजाना औसत 25 यात्रियों की ही जांच हो पा रही है। इस बाबत जिम्मेदारों का कहना है कि अधिकांश यात्री जांच कराने से कतराते हैं।
रोडवेज बस स्टैंड में कैंप लगने के बाद भी बहुत कम लोगों की जांच हो रही है। रोडवेज की 85 बसें विभिन्न रूट पर दौड़ रहीं हैं, जिसमें 24 घंटे में लगभग 13 हजार यात्रियों का आवागमन हो रहा, लेकिन जांच सिर्फ औसतन 25 लोगों की हो पा रही है। दिल्ली रूट पर ही डिपो की 20 बसें दौड़ रहीं हैं, जिसमें करीब दो हजार लोगों को आवागमन हो रहा है, लेकिन सभी की जांच नहीं हो पा रही है। 16 दिसंबर को 24 यात्री, 17 दिसंबर को 29, 18 दिसंबर को 30, 19 दिसंबर को 22 और 20 दिसंबर को 20 यात्रियों की एंटीजन जांच हुई है।
ड्यूटी पर तैनात एलटी जितेंद्र कुमार का कहना है कि लोग जांच कराने से कतराते हैं, जो लोग आसानी से जांच करा लेते है उनकी ही हो पा रही है। उधर, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक हेमंत मिश्र का कहना है कि रोडवेज परिसर में प्रतिदिन 10 से पांच बजे तक कोविड जांच के लिए कैंप लग रहा, लेकिन अपेक्षित जांच नहीं हो पा रही है। अगर पुलिस का सहयोग मिले तो जांच बढ़ सकती है।