महोबा। जिले में सहकारी समितियों पर 42 हजार 255 किसानों पर कुल 48.61 करोड़ रुपये का कर्ज है। औसत से कम बारिश और फसल उत्पादन अच्छा न होने से किसान खाद बीज के लिए लिया गया सहकारी समितियों से ऋण चुका नहीं पा रहे हैं। साल-दर साल यह रकम बढ़ती जा रही है।
बुंदेलखंड में कभी सूखा तो कभी दैवी आपदाओं को झेलता आ रहा है। सरकार भले ही किसानों की 2022 तक आय दोगुनी करने की बात करती है लेकिन किसानों की दशा नहीं बदल सकी है। जिससे किसानों द्वारा सहकारी समितियों से खाद, बीज के लिए कर्ज तो ले लिया लेकिन उसकी अदायगी नहीं कर पा रहे हैं।
जिला सहकारी बैंक द्वारा जनपद में 42 सहकारी समितियां संचालित हैं। सहकारी समितियों द्वारा तीन फीसदी के न्यूनतम ब्याज पर फसली ऋण उपलब्ध कराया जाता है। खेती में नुकसान कहें या फिर भुगतान को लेकर बेपरवाही, कई सहकारी समितियों लक्ष्य के सापेक्ष ऋण की अदायगी नहीं हो पाने की वजह से संकट में हैं। 1995 से लेकर अब तक जिले के 42,255 किसानों पर 48.61 करोड़ रुपये बकाया है।
अब नहीं होती कठोर कार्रवाई
सहायक आयुक्त का कहना है कि समितियों द्वारा वितरित किए गए कर्जा की वसूली इसलिए भी नहीं हो पा रही है क्योंकि अब कठोर कार्रवाई नहीं होती है। 2016 से इस तरह की कार्रवाई लगभग शून्य है। इससे पहले किसानों द्वारा बकाया की अदायगी नहीं न करने पर 14 दिन के लिए जेल भेजा था ,साथ ही कुर्की की कार्रवाई भी होती थी। कार्रवाई न होेने से जो किसान ऋण की अदायगी कर सकते हैं वह भी नहीं करते हैं।
औसत से कम हो रही बारिश
वर्ष - इतनी हुई बारिश (मिमी.) - इतनी होनी चाहिए
2021- 472 - 750
2020- 393 - 750
2019- 559 - 750
2018- 590 - 750
2017- 500 - 750
(नोट- आंकड़े कृषि विभाग से प्राप्त हैं। )
जिले में बीते कई सालों से औसत से कम हो रही है। कम बारिश होने से फसलों का उत्पादन प्रभावित होता है। अच्छी बारिश होने और फसलों को समय से पानी मिलने पर उत्पादन बढ़ जाता है।
बीपी सिंह, जिला कृषि अधिकारी
जिले की 42 सहकारी समितियों पर 42 हजार से अधिक किसानों पर 48.61 करोड़ बकाया है। वसूली को लेकर प्रयास किया जा रहा है।
आरपी गुप्ता, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक
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