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Maharajganj News: बनर्सिहा कला बौद्ध टीले के उत्खनन में ढाई हजार साल पुराने दीवार व पुरावशेष मिले

Thu, 07 Mar 2024 07:44 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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लक्ष्मीपुर। लक्ष्मीपुर विकास खंड क्षेत्र बनरसिहा कला में प्राचीन स्थल का उत्खनन जारी है। बौद्ध टीले से कुषाणकालीन के पहले करीब ढाई हजार साल पहले की दीवारें व पुरावशेष मिलने लगे हैं। पुरातत्वविदों को उम्मीद है कि जल्द बनरसिहा कला के टीले में छुपे रहस्यों से पर्दा उठेगा। अधिक संख्या में मिट्टी के जल पात्र मिल रहे हैं।
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जानकारी के मुताबिक, अब तक मिट्टी के नाद व हण्डी, पानी भंडार करने का एक विशाल जलपात्र, रिंग वेल मिले हैं। दूसरी तरफ चौड़ी दीवारें, मृदभांड पुरावशेषों का मिलना जारी है। बृहस्पतिवार को जो पुरावशेष व दीवारें मिली हैं वह सभी अवशेष ढाई हजार वर्ष से भी पहले की बताई जा रही हैं। जानकारों की माने तो जैसे-जैसे उत्खनन आगे बढ़ रहा है अब कुषाण काल के अंतिम और शुंग काल का प्राथमिक चरण चल रहा है। जल्द ही शुंग काल के पुरावशेष मिलने की पूरी संभावना है। इतिहासकारों को उम्मीद है कि यहां के उत्खनन से इतिहास के रहस्यों से पर्दा जल्द ही उठने वाला है। ऐसा प्रतीत होता है कि यहां बौद्ध संस्कृति व परंपरा को मानने वाले लोग निवास कर रहे थे। जो हजारों वर्षों तक यहां निवास किए थे।
पुरातत्व अधिकारी रामविनय का कहना है कि कुशल कारीगरों व मजदूरों के साथ पुरातत्व विभाग की टीम बनर्सिहा कला के प्राचीन बौद्ध टीले के विभिन्न स्थानों पर उत्खनन कर रही है। इस चरण का उत्खनन मार्च 2024 चलेगा। टीम को लगातार मिट्टी के बर्तन और कुषाण काल के पुराने ईंट ही निकल ही रहे हैं। वर्तमान में मिट्टी के नाद, हण्डी, वर्तन, जल पात्र आदि मिल रहे हैं। जिससे यह संभावना लगाई जा रही है कि इन बड़े बड़े पात्रों में लोग अनाज रख रहे थे। खुदाई में चौंडी दीवारें मिल रही हैं। जो छतिग्रस्त हो गई हैं। इसी तरह से पूरा अवशेष मिलते रहे तो कुछ दिनों बाद स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो जाएगी।
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वर्तमान में जो मृदभांड मिट्टी के बर्तन और ईंट ही निकल रहे हैं जिनका संबंध कुषाण काल से लग रहा है। उससे इतना तो स्पष्ट हो गया है कि यहां बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग का सुसज्जित नगर था। जोकि अब से दो हजार वर्ष पहले का है। शुक्रवार को पानी रखने का मिट्टी का विशाल वर्तन मिला है उसे स्थानीय भाषा मे टैंक या जार भी कह सकते हैं। ऐसा लगता है कि विशाल जनसमूह को पानी पीने के काम में इसे लाया जाता रहा होगा। पुरातत्व अधिकारी का कहना है कि मिट्टी के बड़े बड़े नाद, बर्तन मिलने से ऐसा लग रहा है कि यहां दो हजार वर्ष पहले कोई सुसज्जित नगर रहा होगा। जिनका संबंध गौतम बुद्ध से ही प्रतीत होता है। जल्द ही रहस्यों से पर्दा उठने वाला है। शासन प्रशासन की इस पर पैनी नजर है। उत्खनन के हर पल को कैमरे में कैद किया जा रहा है।
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