रोहिन नदी पर पुल होता तो शायद न होती बर्बादी
लक्ष्मीपुर (महराजगंज)। डंठल से उठी चिंगारी से टेढ़ी गांव के 22 घरों के बर्बाद तमाम लोग मदद की राह देख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रोहिन नदी और मालव नदी पर पुल होता तो अग्निशमन की गाड़ी समय रहते पहुंच जाती। ऐसे में 22 घर राख होने से बच सकते थे। महिला की मौत भी नहीं हुई होती।
टेढ़ी गांव के ग्रामीणों ने आवागमन के लिए रोहिन और मलाव नदी पर पुल बनाने की मांग की है। पुल होने से मौके पर पुलिस का भी वाहन नहीं पहुंच पाया और महिला के शव को पुलिस को अपने कंधों पर ढाई किलोमीटर चलकर गांव से बाहर आना पड़ा था। लक्ष्मीपुर ब्लॉक के जंगल में स्थित भौगोलिक दृष्टि से अति पिछड़ा गांव टेढ़ी में कुल पांच राजस्व ग्राम हैं, जिसमे कांधपुर, ब्रह्मपुर व बेलौहा, गंगापुर व टेढ़ी खास शामिल है, लेकिन इनमें मात्र राजस्व गांव टेढ़ी, गंगापुर ही संपर्क मार्ग बिजली आदि से जुड़ा है।
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तीन राजस्व गांव कांधपुर, बेलौहा, ब्रह्मपुर के 13 टोले तक जाने आने का कोई सुगम मार्ग नहीं है। लोग नदी पार करके जाते हैं। अगर पुल रहा होता तो अग्नि शमन की गाड़ी पहुंच जाती और लोग बर्बाद होने से बच जाते।
- उमेश चौधरी, टेढ़ी
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चारों तरफ से नदी और जंगल से घिरे 13 टोले पर किसी भी तरफ़ से पहुंचने पर जंगल और नदी से गुजरना पड़ता है। नदी पर पुल नहीं होने से अग्नि शमन की गाड़ी टोले तक नहीं पहुंच सकी और 22 घर जल कर राख हो गए।
- बैजनाथ सहानी, टेढ़ी
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जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहे लोगों को गांव से बाहर निकलने के लिए मात्र एक लकड़ी की पुलिया है, जिसे ग्रामीणों ने स्वयं बनाया है। इस पुलिस से साइकिल व पैदल आवागमन हो सकता है।
- नरेश यादव, टेढ़ी
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इतने बड़े अग्निकांड में बर्बाद हुए लोगों का हाल जानने कोई जिम्मेदार जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचा। यह बहुत ही दु:ख की बात है। गांव चारों तरफ से प्यास, रोहिन, मलाव नदी व जंगल से घिरा है। पुल रहता तो किसान बर्बाद नहीं होते।
- उषा देवी, टेढ़ी
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भौगोलिक दृष्टि अति पिछड़ा गांव है। मलाव व रोहिन नदी के बीच बसे गांव में पुल अति आवश्यक है। प्रशासन से लगातार मांग की जा रही है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
- कुसमावती देवी, ग्राम प्रधान