महराजगंज। साइबर ठगी के मामले में गोरखपुर में गिरफ्तार मकसूद आलम गोरखपुर के करीमनगर का नहीं बल्कि महराजगंज के धानी विकास खंड के कोईलाडांड़ गांव का मूल निवासी है। गांव में आज भी उसका पैतृक आवास बंद पड़ा है।
ग्रामीणों के अनुसार वह गांव में किसी आयोजन या घर की साफ-सफाई के लिए कभी-कभार आता-जाता रहता है। ग्रामीणों के मुताबिक 2004 तक मकसूद गांव के पास सिकड़ा चौराहे पर पीसीओ और जूता-चप्पल की दुकान चलाता था।
दुकान से होने वाली आय बेहद कम थी लेकिन जीवनशैली सामान्य से अधिक थी। वर्ष 2004 में उसके बड़े भाई खुर्शीद आलम की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सूत्र बताते हैं कि तीन भाइयों में सबसे बड़ा खुर्शीद ही था और वह दिखावे के लिए सिकड़ा चौराहे पर दुकान चलाता था, जबकि पर्दे के पीछे हवाला के कारोबार से जुड़ा था।
खुर्शीद की हत्या के बाद परिवार में दहशत फैल गई। इसके बाद मकसूद का परिवार धानी के कोईलाडांड़ से निकलकर कोल्हुई क्षेत्र के खरहरवा में जाकर बस गया। बाद में मकसूद गोरखपुर के करीमनगर में आलीशान बिल्डिंग खड़ी कर अपने परिवार के साथ चला गया। तीनों भाइयों में मकसूद सबसे छोटा है। करीमनगर का पता उसने पहचान छिपाने के लिए बताना शुरू किया, ताकि उसकी जड़ें महराजगंज से जुड़ी न दिखें।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, मकसूद के बड़े भाई खुर्शीद की हत्या में शैलेष सिंह को वादी बनाया था, जो अब जाकर दोषमुक्त हो सके हैं।