बागापार। सदर ब्लाॅक के ग्राम सभा परासखांड़ में स्थित प्राचीन शिव मंदिर पर आयोजित श्रीश्री शतचंडी महायज्ञ में बृहस्पतिवार को प्रवचन के दौरान यज्ञाचार्य पंडित कृष्णमोहन तिवारी ने कहा कि भगवान को पाने के लिए भक्ति की आवश्यकता होती है। भक्ति यदि हृदय में है तो वह व्यक्ति निर्धन होते हुए भी तीनों लोकों में धनवान हैं। भगवान भक्त के वश में होते हैं। कहा कि जिस व्यक्ति के हृदय में भगवान की भक्ति होती है तो परमात्मा अपना बैकुंठधाम छोड़कर भक्त के प्रेम के वशीभूत हो उसके हृदय में वास करने लगते हैं। जिस व्यक्ति के हृदय में भगवान वास करें, उससे बड़ा धनवान कौन हो सकता है।
यज्ञाचार्य ने कहा कि भक्ति के बिना लाखों-करोड़ों की संपति भी यदि भगवान पर अर्पण कर दें तो वह बेकार है। यदि भक्ति है तो एक पुष्प भी अर्पण करने से भगवान स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि भक्ति के वशीभूत होकर ही भगवान राम सबरी के यहां पहुंचे और उसके जूठे बेर खाए। वो भक्त ही थी जो विदुरानी द्वारा दिए केले के छिलके को भी भगवान ने खुशी से खाया। भक्ति के कारण ही भगवान श्री कृष्ण अर्जुन के सारथी बने। भक्ति में इतनी ताकत है कि उस परमात्मा को भी लोग पुत्र तक बना लेते हैं। भक्ति करना भी बहुत कठिन है। भक्ति करनी है तो सबसे पहले हृदय को साफ करें। काम, क्रोध, लोभ और मोह का त्याग करें। भक्ति करना है तो सुदामा की तरह संतोष होना चाहिए, क्योंकि जो व्यक्ति संतुष्ट नहीं है, वहीं सबसे बड़ा दरिद्र है। जो भक्त होता है, वह गरीब भले हो जाए लेकिन दरिद्र नहीं हो सकता। भक्ति के लिए विश्वास की जरूरत होती है। बिना विश्वास के भक्ति नहीं हो सकती।
शतचंडी महायज्ञ में क्षेत्र के उमड़े श्रद्धालु
बागापार। दुर्गा मंदिर परासखांड़ में आयोजित श्री श्री शतचंडी महायज्ञ में बृहस्पतिवार को चौथे दिन जन सैलाब उमड़ पड़ा। दिन में लोग यज्ञाचार्य पंडित कृष्णमोहन तिवारी का प्रवचन सुन रहे हैं तो रात में रामलीला मंडल के द्वारा प्रस्तुत रामलीला मंचन का खूब आनंद उठा रहे हैं। यज्ञ में बागापार, विजयपुर, केवलापुर खुर्द, झुंगवा, बड़हरा राजा, नाथनगर, शेखपुरवा, कम्हरिया, बेलभरिया, डिहुलिया, पंडितपुर, परसिया, जोगा टोला, बेलासपुर आदि गांवों के महिला व पुरुष श्रद्धालु परिक्रमा कर रहे हैं।