फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Maharajganj News: संवेदनशील बी गैप गांव के ठोकर संख्या 12-13 पर बना भारी दबाव

Sun, 29 Sep 2024 06:06 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
विज्ञापन
विज्ञापन
महराजगंज। नेपाल की पहाड़ियों से निकलने वाली नारायणी नदी यू तो हर साल बाढ़ के दिनों में उफनाती है और नदी सटे क्षेत्रों को भिगोकर लौट जाती है, लेकिन इस बार भयावह हो गई है। नदी के घटते बढ़ते जलस्तर से लोग सहमे हैं। नदी की तीव्र धाराओं को नियंत्रित करने वाले अंतरराष्ट्रीय तटबंध के संवेदनशील बी गैप बांध के ठोकर संख्या 12 व 13 पर भारी दबाव है।
विज्ञापन

जानकारी के अनुसार, सिंचाई विभाग के अभियंता लगातार तटबंधों की निगरानी में जुटे हैं। वहीं दूसरी तरफ बाल्मिकीनगर बैराज से नदी का डिस्चार्ज रविवार सुबह तक पांच लाख क्यूसेक के पार होने के कारण नदी सटे कई क्षेत्रों में बाढ़ के हालात बने हुए हैं। नेपाल की पहाड़ियों से निकालने वाली नारायणी नदी बरसात के दिनों में यूं तो हर साल उफनाती है, लेकिन नदी इतना भयावह रूप करीब 21 वर्ष बाद लिया है।
31 जुलाई 2003 को नारायणी का जलस्तर रिकार्ड 6 लाख 39 हजार 750 क्यूसेक तक पहुंची थी। इसके बाद नदी हर साल बरसात में उफनाती है और जलस्तर भी बढ़ता है, लेकिन शुक्रवार देर रात से ही पहाड़ों और मैदानी इलाकों में लगातार बारिश से नारायणी नदी के बढ़ते जलस्तर को देख अधिकारियों की बेचैनी बढ़ने लगी थी।
विज्ञापन

वहीं शनिवार रात नारायणी का जलस्तर रिकार्ड 5 लाख 64 हजार 400 क्यूसेक पहुंच गया, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय बी गैप बांध के संवेदनशीलता बी गैप के ठोकर संख्या 12, 12 ए व 13 पर नदी का दबाव बढ़ने लगा। जिसे देख सिंचाई विभाग के अभियंताओं के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगीं।
रविवार भोर से ही नदी का जलस्तर कम होने लगा और शाम होते होते नारायणी का जलस्तर खतरे ढेड़ लाख क्यूसेक से ज्यादा घट गया, जिसके बाद अफसरों ने थोड़ी राहत की सांस जरुर ली। देर शाम तक नारायणी खतरे के निशान के पार ही बह रही थी। तेजी से घटते नदी के जलस्तर से पानी में स्कारविंग करते हुए बड़ी तेजी से ठोकर पर कटान कर रही है, जिससे ठोकर के डैमेज होने की संभावना काफी बढ़ गई है।
सहायक अभियंता सिंचाई खंड द्वितीय अनिल सिंह ने बताया कि बंधे पूरी तरह से सुरक्षित हैं। जलस्तर की निगरानी की जा रही है।

बलुआ टोले की हाल सबसे दयनीय
नारायणी नदी उफनाने से सीमा से सटे निचलौल क्षेत्र के गांव कनमिसवा, गेडहवां, औरहवां, सकरदीनही, बैरा टोला में बाढ़ का पानी घुस गया है। ऐसे में इन गांवों के करीब 500 घर प्रभावित हैं। वहीं बलुआ टोले की हाल सबसे दयनीय है, क्योंकि, यहां पर 200 से अधिक घर पानी से घिरे हैं। लोग बंधों पर शरण लिए हैं। जहां प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को नाव की मदद से बाहर निकाला जा रहा है। गेडहवां ग्राम प्रधान दिनेश शर्मा की ओर से बाढ़ प्रभावित पीड़ितों के लिए भोजन का व्यवस्था की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें