किराया घटने से सामान के मूल्य में होगी कमी, मिलेगी राहत
महराजगंज। इन दिनों बढ़ती महंगाई से समाज के हर वर्ग के लोग परेशान हैं। इस बीच सरकार ने डीजल, पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने का फैसला कर महंगाई से राहत देने का प्रयास किया है। इसकी लोगों ने सराहना करते हुए कहा कि इस प्रयास से काफी हद तक महंगाई नियंत्रित होने में सहायता मिलेगी। किराया भी घट जाएगा, जिससे सामान का मूल्य भी काफी हद तक कम होगा।
केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर आठ रुपये और डीजल पर छह रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाने का फैसला किया है। इससे पेट्रोल 9.50 रुपये और डीजल सात रुपये प्रति लीटर सस्ता होगा। इस फैसले की व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, आम नागरिक, पंप मालिक समेत विशेषज्ञों ने सराहना करते हुए इस प्रयास को जनता के लिए हितकारी बताया।
एक्साइज ड्यूटी घटाने के सरकार के इस फैसले से हर तबके के लोगों को संजीवनी मिलेगी। जब एक्साइज ड्यूटी कम लगेगी तो स्वाभाविक रूप से सबसे पहले किराया सस्ता होगा, जो महंगाई को कम करने में काफी सार्थक सिद्ध होगी। गोरखपुर, काठमांडो, पोखरा जाने पर डीजल में कम रकम खर्च होगी।
-विजय प्रताप श्रीवास्तव, ट्रक मालिक, नौतनवां
एक्साइज ड्यूटी कम होने से डीजल और पेट्रोल के दामों में कमी आएगी तो निश्चित ही हर कार्य और सामान सस्ता होगा। ईंधन आम जनजीवन के लिए एक बड़ा संसाधन है। इनके दामों में कमी आने से लोगों को काफी सहूलियत मिलेगी। सरकार का यह फैसला स्वागत योग्य है।
-रवि मद्धेशिया, व्यापारी, नौतनवां
डीजल के मूल्य में कमी होने से इसका सीधा फायदा जनता को ही मिलेगा। डीजल पेट्रोल मंहगा होने पर किराया भी कम होगा। इससे काफी राहत मिलेगी। सरकार ने यह बेहतर कदम उठाया है। इससे आम जनता को लाभ होगा। पेट्रो पदार्थ महंगा होने से सब पर भारी पड़ रहा था।
-रामानंद सागर, पेट्रोल पंप मालिक, धनेवा धनेेई
गाड़ियों को मंगाने में पहले किराया ज्यादा लगता था, लेकिन अब डीजल का रेट घटने से किराए पर भी इसका असर होगा। सरकार ने यह बेहतर कदम उठाया है। समाज के हर वर्ग के लोगों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। सभी लोगों को इसका स्वागत करना चाहिए।
-राकेश कुमार गुप्ता, सरोजनी नगर
एक्सपर्ट कमेंट
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केंद्रीय उत्पाद शुल्क के रूप में पेट्रोल पर 8 रुपये प्रति लीटर तथा डीजल पर छह रुपये प्रति लीटर की कमी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी और राहत भरी खबर है। क्योंकि मुद्रास्फीति की दर बहुत तेज है और सरकार के पास पर्याप्त राजस्व है। मुद्रास्फीति की तीव्र गति ने मांग और पूर्ति के संतुलन को ध्वस्त कर दिया है जिसका नकारात्मक प्रभाव विनिर्माण और सेवा क्षेत्र पर पड़ रहा है। पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाया जाए तो ये सबसे बेहतर होगा। फिलहाल, इस फैसले से मध्यम-वर्ग और किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। मुद्रास्फीति में भी कमी आएगी। खाद्य वस्तुओं के कीमतों में भी कमी आएगी।
-डॉ. आशुतोष उपाध्याय, असिस्टेंट प्रोफेसर (जयप्रकाश विश्वविद्यालय)