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अपराजिता

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‘बेटियों को स्वावलंबी बनाने के लिए शिक्षा सबसे प्रमुख माध्यम’
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महराजगंज। बेटियों को स्वावलंबी बनाने के लिए शिक्षा सबसे प्रमुख माध्यम है। छात्राएं किसी भी अप्रिय घटना पर चुप न रहें बल्कि उसके खिलाफ आवाज उठाएं। अपराजिता बनना है तो रूढ़िवादिता को त्यागकर हिम्मत और हौसले के साथ आगे बढ़ें। पढ़ाई के साथ-साथ समाज के हितों से जुड़े कार्यों में भाग लें जिससे मानसिक विकास भी होगा। जिस घर में नारी का सम्मान होता है उस घर में देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए हम सभी को अपनी सोच बदलनी होगी और महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठानी होगी।
यह बात एसडीएम निचलौल प्रमोद कुमार ने कही। वह बुधवार की सुबह 10 बजे राष्ट्रीय इंटरमीडिएट कॉलेज बाली में ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ की ओर से ‘अपराजिता’ मुहिम के तहत आयोजित नारी सशक्तिकरण गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे रहे थे। उन्होंने कहा कि ‘मिशन शक्ति’ के तहत बेटियों एवं महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है। सरकार की ओर से बेटियों के हित में तमाम जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित हैं। जो किसी से न हारे वह अपराजिता होती है। स्कूल-कॉलेजों में इस तरह की गोष्ठी कराकर विद्यार्थियों को इस महत्वपूर्ण विषय के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए जिससे समाज में नई चेतना जगाई जा सकती है।
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प्रबंधक सनत कुमार राहुल ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का होना जरूरी है। इससे बेटियों का मनोबल बढ़ेगा। वास्तव में नारी अबला नहीं है। जो मां-बाप अपनी बेटियों को बोझ समझते हैं उन्हें अपनी सोच बदलनी चाहिए। हमें जागरूक होना होगा। प्रधानाचार्य गिरजाशंकर अग्रवाल ने सभी अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया। इस अवसर पर अनिल कुमार पटेल, विजय कुमार, डॉ. संजय कुमार राय, डॉ. अमित प्रताप सिंह, तेज बहादुर पाल, सुधीर कुमार, नीता, सुरेश कुमार, प्रमोद कुमार चौबे, अनिल कुमार प्रजापति, संदीप कुमार जायसवाल, बृजेश कुमार किनकर, राकेश कुमार पटेल, अभिषेक गुप्ता, छाया गुप्ता, मीना गुप्ता, सूर्यकांत विश्वकर्मा आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम 10 से शुरू होकर 11.30 बजे तक चला। कुल 38 लोग शामिल हुए।
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‘अधिकारों के प्रति जागरूक होने की जरूरत’
महराजगंज। हाईस्कूल की छात्रा निभा यादव ने कहा कि महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार नहीं मिल सके हैं। आए दिन दहेज हत्या, महिला उत्पीड़न और दुष्कर्म के मामले सामने आना इसका उदाहरण है। प्रीति कन्नौजिया ने कहा कि नारी को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। महिला सशक्तिकरण एक अहम मुद्दा है। कक्षा नौ की छात्रा खुश्बू कांदू ने कहा कि किसी की काबिलियत का अंदाजा उसके जेंडर से नहीं, मेधा से होता है। कक्षा 11वीं की छात्रा गुड़िया यादव ने कहा कि अपराजिता मुहिम एक अच्छी पहल है। बेटियों को बल मिलेगा और नारी गरिमा को बरकरार रखने में यह पहल मील का पत्थर साबित होगी। अपने हक के लिए महिलाएं आगे आ सकेंगी।
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