बढ़े मरीज तो अस्पताल को आया बुखार, वैक्सीन की दरकार
संजय कुमार पांडेय
महराजगंज। वायरल फीवर के बढ़ते प्रकोप के बीच नवजातों पर भी आफत आन पड़ी है। जिला अस्पताल के नवजात शिशु देखभाल यूनिट में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। किसी को पीलिया की शिकायत है तो कोई संक्रमण का शिकार है। अन्य कई तरह की बीमारियों से पीड़ित नवजात भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि एक बेड पर तीन-तीन नवजातों को भर्ती करना पड़ रहा है।
अस्पताल प्रशासन नवजात शिशुओं के बेहतर इलाज की कोशिश में लगा है। लेकिन संसाधनों की कमी उसके प्रयास पर पानी फेर रही है। एक बेड पर तीन नवजात शिशु होने से उनमें संक्रमण का खतरा है, लेकिन बेबश चिकित्सक चाह कर भी बहुत कुछ कर पाने में असमर्थ हैं। वार्ड में कुल बीस बेड पर मरीज 60 हैं। फिर भी डॉक्टरों का प्रयास और विश्वास है कि हर नवजात हंसता खिलखिलाता अपने घर लौटेगा।
जिला अस्पताल में 1 से 7 सितंबर तक के आंकड़ों पर गौर करें तो नवजात शिशु देखभाल यूनिट में भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ है। 1 सितंबर को 58, 2 सितंबर को 60, 3 सितंबर को 49, 4 सितंबर को 63, 5 सिंतबर को 57, 6 सितंबर को 55 और 7 सितंबर को 60 नवजात शिशु का इलाज चल रहा है। नवजात शिशु देखभाल वार्ड में उन बच्चों को भर्ती किया जाता है, जिन्हें जन्म के बाद समस्या होती है। बच्चे रोए नहीं, मुंह में खराब पानी चला जाय, पीलिया हो जाय तो उन्हें नवजात शिशु देखभाल यूनिट में भर्ती कर इलाज किया जाता है। यहां चिकित्सकों की टीम समय- समय पर मासूमों की जांच कर इलाज करती है। तीमारदारों ने कहा कि जिला अस्पताल में नवजात शिशु की देखभाल इकाई में बेड की संख्या कम है। अगर बेड की संख्या ज्यादा होती तो समस्या नहीं होती। संवाद
नवजात शिशु देखभाल इकाई में अधिकतर इंफेक्शन, समय से पहले जन्म लेने, जन्मजात बीमारी होने के अलावा अन्य बीमारियों के नवजात बच्चे भर्ती किए जाते हैं। अगर एक बेड पर एक से अधिक बच्चे भर्ती किए जाते हैं तो उनमें इंफेक्शन फैलने की संभावना रहती है। लेकिन बचाव करते हुए बेहतर ढंग से इलाज किया जा रहा है।
-डॉ. आरपी राय, बाल रोग विशेषज्ञ
बेहतर ढंग से इलाज होने के कारण ही अस्पताल में भीड़ बढ़ी है। सभी चिकित्सक बेहतर ढंग से इलाज करने में जुटे हैं। बीमार बच्चों के इलाज की बेहतर व्यवस्था जिला अस्पताल में है। सतर्कता के साथ चिकित्सक इलाज कर रहे हैं।
-डॉ. एके राय, सीएमएस