11 आयुर्वेदिक चिकित्सालयों के पास अपना भवन नहीं
महराजगंज। जनपद में संचालित होने वाले 11 आयुर्वेदिक चिकित्सालय प्राथमिक अस्पताल व अन्य जगहों पर संचालित हो रहे हैं। इसकी वजह से जहां मरीजों की संख्या नहीं बढ़ पा रही है वहीं कर्मियों व मरीजों को विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जब तक अस्पताल का निजी भवन नहीं होगा, उनकी समस्या दूर नहीं होगी।
जिले में कुल 20 आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित हैं। इसमें से फरेंदा व जिला मुख्यालय (पकड़ी रमहौली) 25-25 बेड तथा धानी बाजार, बृजमनगंज, फूलमनहा, अड्डा बाजार, सोनौली, रामपुर बल्डीहा, मंगलपुर, बसडीला, बैठवलिया, सिसवां, कोल्हुई, जमुहरा कला व नौतनवां में चार-चार बेड के अस्पताल हैं। वहीं, जिन पांच अस्पतालों में बेड तक की व्यवस्था नहीं है। उसमें ठूठीबारी, सेवतरी, नरकटहा, मिठौरा व सोहगीबरवां का भी नाम है। उपरोक्त अस्पतालों में से सिर्फ नौ अस्पताल ही अपने भवन में संचालित हैं। शेष प्राथमिक अस्पताल व किराए के भवन में हैं। निजी भवन के न होने से जहां अस्पतालों में कर्मियों को कार्य करने में समस्या आती है, वहीं मरीजों की भी बैठने आदि की सुविधा नहीं मिल पाती। जिला आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी राघवेंद्र कुमार मिश्र ने बताया कि निजी भवन के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
इन चिकित्सालयों के पास है अपना भवन
जिले में संचालित 20 अस्पतालों में महज नौ के पास ही अपना भवन है। अपना भवन वाले आयुर्वेदिक अस्पतालों में सेवतरी, अड्डा बाजार, सोनौली, ठूठीबारी, रामपुर बल्डीहा, नरकटहा, बैठवलिया, मिठौरा व सोहगीबरवा हैं। वहीं, धानी का अस्पताल किराए के मकान में चलता है। शेष 10 सरकारी अस्पताल के कमरों में चल रहे हैं।