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यूपी: अब कैसे टेबलेट बांटेगी अखिलेश सरकार?

Tue, 16 Apr 2013 11:25 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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अखिलेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शुमार 10वीं पास विद्यार्थियों में टैबलेट बांटने की योजना दूसरी बार फिर कठिन शर्तों में फंस गई है।
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खुले बाजार में प्रतिस्पर्धा से जूझ रही कंपनियों ने सोमवार को सरकार की ओर टैबलेट खरीद को लेकर आयोजित प्री-बिड कॉन्फ्रेंस में निर्धारित मानक पर आपूर्ति करने से हाथ खड़े कर दिए।

गोमती नगर स्थिति इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हुई कॉन्फ्रेंस में 16 कंपनियां पहुंची। पिछली बार जारी टेंडर में केवल एक कंपनी जांच के लिए अपना टैबलेट प्रस्तुत कर पाई थी। सरकार को मजबूरन दोबारा टेंडर करना पड़ा।
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एक महीने की मशक्कत के बाद दूसरी बार हुई प्री-बिड कॉन्फ्रेंस में एचसीएल, एचपी, इंटेल लेनेवो, विप्रो, माइक्रोमैक्स सहित 16 कंपनियां पहुंची।

कॉन्फ्रेंस में टैबलेट के लिए तकनीकी विशिष्टियां निर्धारित करने वाले आईआईटी के विशेषज्ञ और आरएफपी बनाने वाली कंपनी केपीएमजी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में एक सुर में सभी कंपनियों ने वर्तमान में विशिष्टियां में छूट देने की मांग की।

इधर, बैठक में पहुंचे तकनीकी विशिष्टियां निर्धारित करने वाली तकनीकी समिति चैयरमैन और आईआईटी कानुपर के प्रोफेसर टीवी प्रभाकर द्वारा कंपनियों के आग्रह पर किसी भी तरह की छूट देने से साफ इनकार करने से मामला फंस गया। प्रभाकर कहना है कि वे टैबलेट खरीद के निर्धारित गुणवत्ता में किसी तरह समझौता नहीं कर सकते।

क्या है पेंच
-सरकार ने टैबलेट की जो खूबियां व मानक तय किया वह बाजार में उपलब्ध टैबलेट से काफी हटकर हैं। ऐसे में कंपनियों को इन टैबलेट के लिए कई तरह के अतिरिक्त संसाधन जुटाने होंगे।

-एक सरकारी टैबलेट की अनुमानित कीमत 3500 रुपये आंकी गई है, जबकि बाजार में सरकार द्वारा निर्धारित मानक के टैबलेट करीब 22 हजार रुपये में उपलब्ध है। वह भी केवल एक कंपनी एप्पल बना रही है, जो रुचि ही नहीं ले रही है। इतने कम कीमत में आपूर्ति करने को कंपनियों रुचि नहीं दिखा रही।
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-सरकार विद्यार्थियों को दिए जाने वाले टैबलेट का बैट्री बैकअप चार से पांच घंटे चाहती है जबकि बाजार में उपलब्ध टैबलेट दो से तीन घंटे का ही बैटरी बैकअप देते हैं।
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