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......नारी पीठ पर नवजात शिशु ले युद्ध करती है

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महरौनी(ललितपुर)। महर्षि दयानंद सरस्वती योग संस्थान आर्य समाज की ओर से आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की जयंती पर ऑनलाइन अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें कवियों
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ने अपनी महारानी लक्ष्मीबाई की वीरता का गुणगान किया। कवि आकांक्षा बुंदेला की कविता ‘नाम मनु था मर्दानी थी जो गोरों की खाई बनी..’ खूब पसंद की गई।
कवि दिनेश यागिक रायसेन ने वो गोरों से भी लड़ती है अमर इतिहास गढ़ती है, आन पर आग के पोखर से भी होकर गुजरती है... कविता प्रस्तुत की। इंद्रप्रस्थ गुरुकुल फरीदाबाद से राष्ट्रीय कवि धर्मेश अविचल ने ‘वक्त है अब लेखनी तू काम कर तलवार का, जिंदगी जिंदादिली से शब्द भर हुंकार का..।’
हिंदी साहित्य भारती उत्तर प्रदेश के महामंत्री डॉ. चैतन्य चेतन ने ‘जहां तुम्हारे पग थक जाए आगे मुझे बढ़ा देना’ कविता सुनाई। जनपद के मिदरवाहा से आकांक्षा बुंदेला ने नाम मनु था मर्दानी थी जो गोरों की खाई बनी, बुंदेलखंड की रानी थी जो सबकी लक्ष्मीबाई बनी कविता पढ़ी। इस मौके पर सतीश यादव, महेश योगी, नेमि चंद्र व्योम, घनश्याम दास, रवि कुशवाहा, रामेश्वर गुप्ता, अखिलेश त्रिपाठी, संजय, रामजी, राजा परमार, सत्यदेव श्रीवास्तव ने काव्यपाठ किया। वेबिनार में जिला पंचायत सदस्य अमर सिंह विश्वकर्मा घुटारी, मुनि पुरुषोत्तम वानप्रस्थ, कवि राम नरेश निरंजन, रामकुमार राजूपत ठेकेदार आदि जुड़े रहे। कवि सम्मेलन का संयोजन शिक्षक लखन लाल आर्य एवं पंडित बाबूलाल दुबे मानस मधुप की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।
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