डोंगराखुर्द। जिले में सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व की धरोहरों की कमी नहीं है लेकिन इन प्राचीन विरासतों की उचित देखभाल न होने की वजह से इन पर्यटन स्थलों का अस्तित्व पर संकट में है। दर्जनों स्थल ऐसे हैं जो आकर्षक नक्काशी युक्त धार्मिक और पुरातात्विक महत्व को दर्शाते हैं। देखभाल एवं विकास की जगह इन मंदिरों में पुरातत्व विभाग मात्र एक साइन बोर्ड लगाकर भूल गया। अगर इन स्थलों के विकास के लिए उचित प्रयास किए जाते तो जनपद में पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलता । जनपद में चांदपुर-जहाजपुर में अपार पुरातत्व संपदाएं बिखरी पड़ी हैं।
विंध्याचल पर्वत श्रंखलाओं के बीच चंदेल कालीन पुरातत्व एवं प्राचीन संपदाओं के लिए विख्यात है। यहां मंदिरों में देवी-देवताओं की मूर्तियां आज भी अपने आप में लोक गाथाओं को संजोए हुए हैं। जनपद में चांदपुर-जहाजपुर में अपार पुरातत्व संपदाएं बिखरी पड़ी हैं। बेतवा नदी के किनारे चांदपुर-जहाजपुर स्थित कुछ एक मंदिरों में ही मूर्तियां विराजमान हैं और वह भी खंडित हो चुकी हैं। जहाजपुर में तला का बाड़ा के दो तरफ के प्राचीन खंडित मंदिर अतीत की कहानी खुद ही बयां कर रहे है। लाल पत्थरों से बने इन प्राचीन मंदिरों के प्रत्येक द्वार पर देवी-देवताओं की आकर्षण कलाकृतियां बनी हुई हैं। अधिकांश स्थानों पर नंदी और वराह भगवान की मूर्तियां भी मौजूद हैं ।
तालाब के पीछे की ओर दो मंदिर हैं जहां एक मंदिर के चारों ओर मुख्य द्वार के साथ दीवारों पर भगवान श्रीगणेश और वराह भगवान के अलावा अन्य देवी-देवताओं के साथ ही हाथी, घोड़ा और शेर की कलाकृतियां भी बनी हुई हैं, जिनकी भव्यता देखते ही बनती है। यहां पर कम पानी वाले तालाब के बीचों बीच एक स्तंभ है, इस पर भी कलाकृतियां उकेरी गई हैं। वहीं रेल लाइन के दूसरी ओर पश्चिम दिशा में ही पत्थरों की बाउंड्री युक्त आधा दर्जन खंडित मंदिरों का देवस्थान भी स्थित हैं, जो अपनी बर्बादी की कहानी बयां करता है। स्थानीय लोगों के अनुसार उनके और उनके पूर्वजों द्वारा इन मंदिरों को इसी स्थिति में देखा गया है। इन मंदिरों के चारों ओर बिना शिवलिंग के दर्जनों आधार शिलायुक्त अवशेष भी नजर आते हैं। वहीं यहां विशाल मानव पैर नुमा अधूरी सैकड़ों प्रतिमाएं भी बिखरी पड़ी हैं।
दर्शनीय स्थलों पर पर्यटकों के लिए सुविधाओं की है कमी
जनपद के धौर्रा रेलवे स्टेशन से करीब चार किलोमीटर दूर चांदपुर-जहाजपुर स्थित है। यहां रेलवे गेट के पूर्व की ओर चांदपुर और पश्चिम की ओर जहाजपुर स्थित है। हालांकि दोनों स्थानों पर मात्र रेल पटरियों के बीच का ही फासला है, लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए न तो सड़क मार्ग ही सुगम है और न ही पानी और बिजली की कोई व्यवस्था की गई है। इस स्थान पर यहां मंदिर के बाहरी दीवार पर अत्यंत महत्वपूर्ण सहस्त्र लिंगेश्वर और विष्णु भगवान की मूर्तियां उकेरी गई हैं जो लगभग दसवीं से तेरहवीं सदी के बीच की हैं।
आकर्षण का केंद्र रहा है बुंदेलखंड
पुरातत्व विदों और इतिहास कारों के लिए बुंदेलखंड सदैव आकर्षण का केंद्र रहा है। इस क्षेत्र में पुरातत्व संपदा और अनेक धार्मिक स्थल मौजूद हैं। जिनमें हिंदू और जैन मंदिर पाए जाते हैं। यहां पर बिलमोरी बेल मंदिर, जैन मंदिर, झम्मार मंदिर, सहस्त्र लिंगेश्वर, हजारिया महादेव, जंगल में स्थित लघु मंदिर, वराह मंदिर, भंङारिया नाम से प्रसिद्ध विष्णु भगवान एवं पंचमढी मंदिर बने हैं।