ललितपुर। नगर पालिका बोर्ड की सोमवार को हुई बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। पार्षदों ने अध्यक्ष रजनी साहू व ईओ निहालचंद्र पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए। वहीं, मनोनीत पार्षद अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी का बचाव करते नजर आए। करीब दो घंटे तक चली बैठक में कोई प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। पालिकाध्यक्ष ने बैठक को स्थगित करते हुए शनिवार को दोबारा बैठक बुलाने का निर्णय सुनाया।
लंबे समय बाद नगर पालिका परिषद में सोमवार को सुबह लगभग 11 बजे से शुुरू हुई। जब एजेंडा पढ़ने की बारी आई तो पार्षदों ने टोकाटाकी कर कई प्रस्ताव शामिल न होने के आरोप लगाए। पार्षदों ने अध्यक्ष व ईओ से बोर्ड बैठक की कार्रवाई रजिस्टर में दर्ज नहीं होने की आपत्ति जताई। उन्होंने मांग की है बोर्ड में होने वाली सभी चर्चाओं को कार्रवाई रजिस्टर में दर्ज किया जाए। हैंडपंप मरम्मत की शिकायत दर्ज करने के लिए टोल फ्री नंबर जारी करने के लिए पार्षद पंकज मोदी ने बोर्ड में प्रत्येक माह बैठक बुलाए जाने के लिए कहा। साथ ही अध्यक्ष व ईओ पर कर्मचारियों पर का शोषण करने व सफाई कर्मचारियों को कमीशन खोरी के चलते हटाए जाने की बात कही। इस पर अधिशासी अधिकारी ने वेतन भुगतान की मद न होने का हवाला दिया।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष कंबल व अलाव को लकड़ी का बजट पास हुआ था, जो अब तक स्वीकृत नहीं किया गया है। साथ ही बताया कि चार वर्ष में एक भी मार्ग में सड़क का प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हो सका है। पार्षद कृष्णकांत ने कहा कि निरस्त समिति को अस्तित्व में लाया जाए। इसके लिए अध्यक्ष को पत्र जारी करने का सुझाव दिया। इस पर काफी देर तक चली बहस के बावजूद अध्यक्ष के पत्र जारी न करने पर तीखी नोकझोंक हुई। इसी तरह अन्य पार्षदों ने भी अपने प्रस्ताव रखे। अंत में अध्यक्ष रजनी साहू ने बोर्ड बैठक स्थगित करते हुए आगामी बैठक शनिवार को आयोजित करने की घोषणा की। इस दौरान पार्षद उदय प्रताप यादव, पूजा ग्वाला, जहीर अली रानू, मुकेश रजक, रामबाबू यादव, रामवती, रोहित राठौर, अफजुल रहमान, नाजिया, रजा, मंजू लवली शर्मा, कुंजलता कुशवाहा, महेंद्र कुमार सिंघई, हरिओम कुशवाहा, आलोक जैन, जगभान, शिवानी पाठक, आशा श्रीवास्तव, देवेंद्र श्रीवास्तव, भरत पुरोहित, गोकुल प्रसाद लोधी, रजनी अहिरवार आदि मौजूद रहे।
पार्षद बोले-तानाशाही नहीं चलेगी, दस लाख भुगतान का मुद्दा छाया रहा
बोर्ड बैठक के दौरान पार्षद भारत भूषण चौरसिया ने कहा तानाशाही नहीं चलेगी। समय से बैठक बुलाई जाए, बोर्ड में होने वाली चर्चाओं को कार्रवाई रजिस्टर में डाला जाए। इसके साथ ही वित्तीय अधिकारों को लेकर बहस हुई। जिसमें अधिकारों से ज्यादा खर्च करने का मुद्दा गर्माया रहा। उन्होंने पैसों का भुगतान कर दिया जाता है, पर इसकी जानकारी बोर्ड को नहीं होती है। बोर्ड में सबसे अधिक मुद्दा वित्तीय भुगतान का छाया रहा। बोर्ड में पार्षद भारत भूषण चौरसिया ने एजेंडा पढ़े जाने के दौरान 15 हजार के भुगतान की स्वीकृृति थी, लेकिन जब अध्यक्ष व ईओ द्वारा दस लाख का भुगतान किया गया। जब पार्षदों ने बैठक में भुगतान का आधार पूछा तो जवाब नहीं दे सके। यह मुद्दा बैठक में गर्माया रहा। साथ ही बिना सहमति के 15वें वित्त में प्रस्ताव भेजने के आरोप भी लगाए गए
निर्वाचित व नामित पार्षदों में हुई तीखी नोकझोंक, अर्मादित भाषा का किया गया प्रयोग
पालिका सभागार में बैठक के दौरान निर्वाचित व शासन द्वारा नामित पार्षदों में तीखी नोकझोंक हुई। दोनों एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगाते रहे। इतना नहीं चोर बेईमान तो कौन दूध का धुला है यहां तक भी बहस होती रही। निर्वाचित पार्षद भारत भूषण चौरसिया ने कार्य पहले और प्रस्ताव बाद में देने के आरोप लगाए तो अध्यक्ष का बचाव करते हुए कहा दस करोड़ रुपये विकास के लिए पड़े, लेकिन खर्च नही हो पा रहे हैं। शासन द्वारा नामित पार्षद गोकुल प्रसाद ने बैठक में कहा कि अब तक मेरे द्वारा दिए गए एक भी प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हो सके हैं। सड़क को लेकर एक प्रस्ताव दिया था, जिसका अब तक पता तक नहीं चल पाया कि क्या हुआ।
बोर्ड बैठक में पार्षद व अध्यक्ष और ईओ से बहस के दौरान तीखी बहस हुई। कुछ पार्षद ईओ अध्यक्ष के बचाव में उतरे। इस दौरान एक दूसरे में विवाद होने लगा। इस दौरान अर्मादित भाषा का भी प्रयोग किया गया। कुछ पार्षद सभागार से बाहर चले गए। हालांकि कुछ देर बाद वापस आ गए। हालांकि इस दौरान किसी भी तरह का सामंजस्य नहीं हो सका। बैठक बेनतीजा साबित हुई।
अध्यक्ष के पक्ष में उतरे नामित पार्षद
अंत में नामित पार्षद अध्यक्ष के पक्ष में उतर आए। उन्होंने कहा कुछ लोग गुटबाजी कर रहे हैं। गुटबाजी की चर्चाएं होती हैं, जिसके मन का न किया तो विरोधी हो गए। इससे पहले अच्छे थे। तीन वर्ष में कोई परेशानी नहीं हुई। अब कुछ माहों से परेशानी होने लगी। यह ठीक नहीं है।