स्कूल में सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मास्क, सैनिटाइजेशन आवश्यक किया गया है। बच्चों में अब भय नहीं है, उन्हें पहले से ही कोरोना के प्रति सजग रहने के लिए जागरूक किया जा रहा है, लेकिन दो साल के बाद स्कूल खुलने के बाद भी चालीस फीसद बच्चे स्कूल आए ही नहीं।
कोरोना काल की तीन लहरों ने जहां आमजन को तोड़कर रख दिया है, वहीं स्कूलों में स्टाफ को कोविड वैक्सीजन की दोनों डोज एवं स्कूली बच्चों को स्कैनिंग के साथ ही प्रवेश दिया जा रहा है। साथ ही सैनिटाइजेशन और आनलाइन से आफलाइन पढ़ाई का विकल्प फिर से खुलने पर अध्यापकों और विद्यार्थियों में ज्यादा रोचकता भी बढ़ी है।
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कोरोना की पहली और दूसरी लहर ने जहां पूरे देश को हिलाकर रख दिया और कई परिवारों पर तो सीधा असर पड़ा है। वहीं दो वर्षों से लगातार विद्यालय बंद होने से आनलाइन पढ़ाई का विकल्प भी खुल गया, लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई को अध्यापक छात्र-छात्राओं की भौतिक स्थिति को कमजोर मान रहे हैं। ऐसे में बच्चों को बौद्घिक स्तर भी काफी कमजोर हुआ है। अब कोरोना काल की तीसरी लहर कम होने पर स्कूल तो खुल गए हैं, लेकिन कोरोना के प्रति बच्चों व अध्यापकों को भय अब भी दिखाई देता है। हालांकि पूरे स्कूल स्टाफ को कोविड की दोनों वैक्सीन की अनिवार्यता के साथ ही मास्क, सैनिटाइजेशन आवश्यक हो गया है। अब किशोरों का टीकाकरण भी शुरू कर दिया गया है।
स्कूल में सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मास्क, सैनिटाइजेशन आवश्यक किया गया है। बच्चों में अब भय नहीं है, उन्हें पहले से ही कोरोना के प्रति सजग रहने के लिए जागरूक किया जा रहा है, लेकिन दो साल के बाद स्कूल खुलने के बाद भी चालीस फीसद बच्चे स्कूल आए ही नहीं। इसके लिए उनके परिजनों से संपर्क किया जा रहा है। -डीएस-विवेक, डायरेक्टर, सेंट्रल पब्लिक स्कूल।
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स्कूल में विद्यार्थियों के लिए कोविड अनुरूप सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। दो साल से ऑनलाइन पढ़ाई कराई गई, लेकिन मात्र 50 से 55 फीसदी बच्चों में ही ऑनलाइन पढ़ाई में दिलचस्पी दिखाई, लेकिन ऑफलाइन का कोई विकल्प नहीं है। कोविड के प्रति जागरूक करने के लिए विद्यालय मेें जगह-जगह कोविड से बचाव के लिए स्टीकर आदि चस्पा किए गए हैं। -प्रियंका यादव, प्रिंसिपल, सेंट्रल पब्लिक स्कूल।