ललितपुर। जिला महिला अस्पताल में प्रसव में लापरवाही से नवजात की मौत के आठ साल पुराने मामले में कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन दो महिला डॉक्टर, एक स्टाफ नर्स सहित चार लोगों के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है। कोतवाल ने एसआई मनोज कुमार सिंह को मुकदमा की विवेचना सौंप दी गई है।
कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला झांसीपुरा निवासी विमला पत्नी पूरनलाल अहिरवार ने न्यायालय को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि वर्ष 2014 में उसकी पुत्रवधू रंजना पत्नी पंकज कुमार का इलाज जिला महिला अस्पताल की महिला सर्जन डॉ. गीतांजलि से चल रहा था। डॉ. गीतांजलि की सलाह पर चार दिसंबर 2014 को सुबह साढ़े छह बजे रंजना को प्रसव के लिए जिला महिला शिशु वार्ड में भर्ती करा दिया। डॉक्टर ने उसी दिन दोपहर में सामान्य प्रसव होने की सलाह दी। रात्रि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर आशू बजाज को बुलाने पर डॉ. गीतांजलि उपचार लिखकर सामान्य प्रसव रात में होने की बात कहकर चली गई।
फिर रात्रि साढ़े बारह बजे प्रसव कराया गया, लेकिन वहां कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था। प्रसव के समय स्टाफ द्वारा काफी मशक्कत की गई, जिस पर बच्चा तो हो गया, लेकिन शिशु की मौत हो गई। यदि डॉक्टर द्वारा ऑपरेशन की सलाह दी होती तो बच्चा जीवित होता। उसे धोखे में रखा गया। वहीं दूसरी लापरवाही टीके लगाने में की गई, जिससे उसकी बहू के शरीर से काफी रक्त निकल गया। उसके बेटे द्वारा उसे खून दिया गया। फिर छह दिसंबर 2014 को मंडलायुक्त का कार्यक्रम होने के कारण शिकायत होने के भय से बहू को जबरन डिस्चार्ज कर दिया। उसने आरोप लगाया कि लापरवाही डॉ. गीतांजलि, डॉ.आशू बजाज एवं स्टाफ नर्स ज्योति थॉमस द्वारा नवजात शिशु को जीवित पैदा होने से रोकने एवं मृत्यु कारित करने के आशय से की गई। उसने इसकी शिकायत जिलाधिकारी व मुख्य चिकित्साधिकारी को भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिस पर उसे न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। अब कोतवाली पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर आठ वर्ष बाद उक्त मामले में दोनों महिला डॉक्टरों, स्टाफ नर्स एवं एक अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।