डोंगराखुर्द/ललितपुर। कस्बा नाराहट की आबादी करीब 20 हजार होने के बाद भी मरीजों के उपचार के लिए एक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं बन सका। इलाकाई ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से लेकर अफसरों तक से स्वास्थ्य केंद्र बनवाने की मांग की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
कस्बा नाराहट से आसपास के दर्जनों गांव जुड़े होने के बाद भी यहां स्वास्थ्य केंद्र नहीं खोला गया है। ग्रामीणों की माने तो नाराहट में स्वास्थ्य केंद्र बनवाने के लिए भरसक प्रयास किए हैं। कई बार शासन प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों को भी अवगत कराया गया लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। ग्रामीण करीब बीस सालों से नाराहट में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनवाए जाने की मांग करते चले आ रहे हैं। उनका कहना है कि मरीजों को 40 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है।
गंभीर बीमारी की हालत में कभी कभी यह सफर जानलेवा साबित हो जाता है। जिला मुख्यालय पहुंचने से पहले ही मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। गरीब असहाय लोगों की स्थिति और भी दयनीय हो जाती है उनके पास जिला मुख्यालय जाकर इलाज कराने के लिए पैसों की व्यवस्था नहीं होती मजबूरी में प्राइवेट चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है। स्वास्थ्य केंद्र के अभाव में ग्रामीणों को समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाता है। यहां के लोगों को स्वास्थ्य केंद्र के नाम पर सिर्फ भरोसा ही मिलता रहा है ।
कस्बा नाराहट में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनवाने के संबंध में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्री से व्यक्तिगत भेंटकर अवगत कराया था। उन्होंने अस्पताल बनवाने का आश्वासन दिया है। मनोहर लाल पंथ श्रम सेवा योजन राज्य मंत्री।
नाराहट में अस्पताल बनवाने की मांग करीब बीस सालों से चल रही है। अस्पताल बनने से गरीब और असहाय लोगों का बहुत भला होगा। शासन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन देकर मांग की गई है। रानू राजा, प्रधान नाराहट।
अस्पताल बनवाने के लिए जिला प्रशासन को और स्वास्थ्य मंत्री को प्रस्ताव दिया गया है और मैं प्रयास करता रहूंगा। मनोज कुशवाहा, सदस्य जिला पंचायत क्षेत्र नाराहट।