किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म मामले में सामने आ रहे नामों में एक आरोपी का नाम तीन वर्ष पूर्व एक चर्चित सेक्स रैकेट कांड में भी शामिल था। इस मामले में उसके खिलाफ नामजद रिपोर्ट की गई थी, लेकिन बाद में साक्ष्य के अभाव में न्यायालय से उसे बरी कर दिया था, जबकि अन्य लोगों को सजा सुनाई गई थी, लेकिन अब फिर से उसका नाम इस मामले में आया है।
पार्टी के शीर्ष नेताओं के नाम आने से राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ी
किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले में राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के नाम आने से राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। कोई इस घटना को सही बता रहा है तो कोई इसे परिवार में अनबन का मामला बता रहा है। वहीं कई लोग दिन भर नामों की पुष्टि करने में लगे रहे कि कौन-कौन सी पार्टी के नेता या अन्य लोग इसमें शामिल हैं। हालांकि किशोरी के मोहल्ले के आसपास के लोग दबे मुंह से यह भी बता रहे हैं कि किशोरी ज्यादा किसी से बात नहीं करती थी, लेकिन उसके परिवार जनों के राजनीतिक लोगों से जुड़े होने की बात भी की जा रही है।
-विरोधियों द्वारा राजनीतिक द्वेष भावना से एक फर्जी मामला बनाकर नाबालिग लड़की से झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया है। इसमें उसके चार भाइयों, सपा के नगर अध्यक्ष का नाम भी लिखा दिया गया है। इसके अलावा एक पार्षद और बीएसपी के जिलाध्यक्ष का नाम भी लिखाया है। लड़की ने अपने पिता, चाचा और ताऊ पर भी आरोप लगाए हैं। एफआईआर देखकर ही लग रहा है कि पूरा मामला झूठा है। इस मामले में जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करता हूं। यदि कोई दोषी है तो उसे दंडित किया जाए, लेकिन झूठा न फंसाया जाए। यह उनके खिलाफ षड़यंत्र किया गया है। यदि उनकी छवि को और उनके परिवार को बर्बाद करने का प्रयास किया जाएगा तो वह आत्महत्या करने को विवश होंगे। उस महिला का पति से विवाद है और उसने बहकावे में आकर यह सब किया है। इस मामले में वह बुधवार को डीएम को ज्ञापन देकर निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे।
तिलक यादव, जिलाध्यक्ष समाजवादी पार्टी।
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उनके खिलाफ जो मुकदमा लिखाया गया है वह पूरी तरह झूठा है और विरोधियों द्वारा षड़यंत्र किया गया है। उनका उस किशोरी या उसके परिवार से कोसों तक संबंध नहीं है, न ही वह उसे जानते हैं। इस मामले की निष्पक्ष व स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से जांच होनी चाहिए।
दीपक अहिरवार, जिलाध्यक्ष, बसपा।
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