ललितपुर। जिले में प्राचीन बावड़ी को भी अब मनरेगा से संवारा जाएगा। इसके लिए विभाग ने एस्टीमेट तैयार करना शुरू कर दिया है। छह विकास खंडों में 35 बावड़ियों के निर्माण की रूपरेखा तय की गई है।
प्राचीन समय में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोत का मुख्य साधन बावड़ी थीं। इन बावड़ी में पानी लेने जाने के लिए गहरी होने के चलते उनमें लोगों द्वारा एक ओर दूर से पानी की ओर ढलानयुक्त सीढ्यिां बनाई जाती थीं। जिससे बावड़ी में जल स्तर कम होने पर लोग उन सीढ़ियों का सहारा लेकर पानी प्राप्त कर लेते थे।
लंबे समय से इन बावडियों का रखरखाव नहीं होने के कारण इनका अस्तित्व खतरे में आ गया था, लेकिन अब शासन द्वारा पुरानी व प्राचीन बावड़ियों का संरक्षण कराया जा रहा है। ताकि उनकी प्राचीनता के साथ ही जल संरक्षण भी किया जा सके। पूरे जिले में वर्तमान में 70 बावड़ी हैं। जिनमें अकेले शहर में ही चार बावड़ी और सभी छह विकास खंडों के अंतर्गत कुल 66 बावड़ी हैं। इनमें 35 बावड़ी का मरम्मतीकरण कराया जाना है। जिसके तहत 13 बावड़ी का निर्माण शुरू हो गया है। जबकि 14 बावड़ी का एस्टीमेट बनाया जा रहा है। वहीं बार क्षेत्र में एक, बिरधा विकास खंड में चार, जखौरा में एक एवं महरौनी विकास खंड के अंतर्गत दो बाबड़ियां के मरम्मतीकरण का कार्य पूरा हो गया है।
सभी छह विकास खंडों के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित पुरानी बावड़ी के गहरीकरण एवं मरम्मतीकरण का कार्य मनरेगा योजना से कराया जा रहा है। अभी तक मनरेगा योजना से आठ बावड़ी का जीर्णोद्धार कराया जा चुका है। जबकि 13 बावड़ी में कार्य चल रहा है और 14 के एस्टीमेट बनाए जा रहे हैं।
-रविंद्र वीर यादव, डीसी मनरेगा।