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आंदोलनकारियों में सबसे कम उम्र के थे मोतीलाल...

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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. मोतीलाल अवस्थी - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। ललितपुर की माटी में जन्मे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. मोतीलाल अवस्थी आंदोलनकारियों में सबसे कम उम्र के थे। उन्होंने सोलह वर्ष की उम्र में अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंक दिया था और 25 जनवरी 1968 को धरती
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मां की गोद में वह सदा के लिए सो गए।
पं. मोतीलाल अवस्थी का जन्म 11 जुलाई 1923 को महरौनी तहसील अंतर्गत ग्राम गुढ़ा में मोहन लाल अवस्थी के परिवार में हुआ था। तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। वह प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ चले गए थे। यहां स्वतंत्रता आंदोलन चल रहा था। वह महात्मा गांधी की प्रेरणा से सोलह वर्ष की आयु में लुहारी में अंग्रेजों के खिलाफ खड़े हो गए थे। वह आंदोलनकारियों में सबसे कम उम्र के थे। वर्ष 1941 में पहली बार वह जेल गए। इस दौरान उन्हें अनेक यातनाएं झेलनी पड़ीं। पैतृक ग्राम में शिक्षा की ज्योति जलाने के उद्देश्य से वर्ष 1957 में मदन मोहन मालवीय के नाम से शिक्षण संस्था की स्थापना की। उन्होंने स्वयं प्रधानाचार्य का पद संभालकर संस्था को आगे बढ़ाया। वर्ष 1966 में संस्था को हाईस्कूल की मान्यता भी दिलवाई। वर्तमान में इसे झांसी मंडल के उच्च कोटि के विद्यालयों में गिना जाता है। 25 जनवरी 1968 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
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अनेक संस्थाओं में रहे प्रधानाचार्य
माध्यमिक शाला जतारा, पलेरा, लिधौरा, टीकमगढ़ व बड़ागांव सहित अनेक संस्थाओं में प्रधानाचार्य का पद संभाला। उन्होंने पहले अंग्रेेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। इसके पश्चात निरक्षरता को दूर करने का संकल्प लेकर आगे बढ़े। ग्राम गुढ़ा का विद्यालय का उदाहरण है। उन्होंने मध्य प्रदेश के लगे गांव में शिक्षण संस्था स्थापित कर शिक्षा की ज्योति जलाने का काम किया है।
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