ललितपुर। जिले में उपचार की बेहतर सुविधाएं दिलाने के लिए जिला अस्पताल को उच्चीकृत कर मेडीकल कॉलेज खोले जाने की घोषणा हो चुकी है। दस एकड़ जमीन लेकर विभाग को दे दी गई। कार्यदायी संस्था द्वारा एस्टीमेट तैयार कर शासन को भेज दिया गया, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सका है। ऐसे में जिलेवासियों के लिए मेडिकल कॉलेज अभी सपने के ही तरह है।
जिला अस्पताल में 140 विस्तर स्वीकृत हैं, लेकिन 225 बेड संचालित हो रहे हैं। साथ ही 60 वेड जिला महिला अस्पताल में हैं। यहां प्रतिदिन डेढ़ हजार मरीज उपचार के लिए आते हैं, लेकिन, सुविधाओं के अभाव में कई मरीजों को रेफर किया जाता है। इसके चलते कई गंभीर मरीज रास्ते में ही उपचार के अभाव में दम तोड़ देते हैं। इससे छुटकारा दिलाने के लिए पांच मई 2017 में जिले में मेडिकल कॉलेज खोले जाने की घोषण की गई। इसके लिए विकासखंड जखौरा के ग्राम अमरपुर मंडी के पास करगन-दैलवारा रोड पर दस एकड़ जमीन अधिग्रहण की गई।
मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड इकाई को चयनित किया गया। इकाई ने कॉलेज का पूरा नक्शा तैयार कर लिया है, जिसमें दो सौ मीटर लंबाई और दो सौ मीटर चौड़ाई के क्षेत्रफल में भवन का निर्माण किया जाएगा। इसमें सौ एमबीबीएस छात्रों के पढ़ने की सुविधा दी जाएगी। सौ बेड का ब्यॉय हॉस्टल भी तैयार होगा। इसमें आईसीयू, कैंसर यूनिट, सामान्य रोगी यूनिट की अलग व्यवस्था करने का प्रावधान है। लेकिन, मेडिकल कॉलेज निर्माण की प्रक्रिया थम सी गई है। हालत यह है कि वर्तमान में जमीन का समतलीकरण भी नहीं किया गया है और न ही जमीन से निकली हाईटेंशन लाइन हटाई गई है।
इतनी राशि से होगा निर्माण
राजकीय निर्माण निगम द्वारा मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए 27 करोड़ 650 लाख 69 हजार रुपये का एस्टीमेट बनाया गया है। इसके जारी होते ही यहां मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए एस्टीमेट के अनुसार आने वाले खर्च का 80 प्रतिशत केंद्र सरकार व 20 प्रतिशत राज्य सरकार देगी।
बंजर भूमि पर किया जाएगा मेडिकल कॉलेज निर्माण
अमरपुर में करगन-दैलवारा रोड पर दस एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है। यह जमीन बंजर है। यहां पर बड़े चट्टान जैसे पत्थर हैं। यहां से हाईटेंशन लाइन भी निकली है। जिसे हटवाकर मेडिकल कॉलेज का निर्माण कराया जाएगा। मेडिकल कॉलेज बन जाने से जनपद के साथ ही टीकमगढ़, मालथौन, चंदेरी व आसपास के मध्य प्रदेश के लोगों को गंभीर रोगों के इलाज की सुविधा हो जाएगी।
रेफर किए जाते हैं मरीज
जिला अस्पताल आने वाले मरीजों में अधिकांश गंभीर मरीजों को सुविधाओं के अभाव में रेफर किया जाता है। जिले के लगभग पांच सौ से अधिक मरीज झांसी, ग्वालियर, भोपाल व दिल्ली जाते हैं। दुर्घटनाओं में घायल बहुत से मरीजों को गंभीर होने की स्थिति में जिला चिकित्सालय में प्राथमिक उपचार के बाद झांसी या अन्य जिलों में रेफर कर दिया जाता है। इसमें बहुत से मरीजों की सही समय पर इलाज के अभाव में मौत हो जाती है।
मेडिकल कॉलेज के लिए निमा़ॱरण इकाई ने एस्टीमेट तैयार कर स्वास्थ्य मंत्रालय भेज दिया है। अब स्वीकृति मिलने का इंतजार किया जा रहा है। स्वीकृति के बाद मेडिकल कॉलेज का निर्माण शुरू हो जाएगा।
-डॉ. प्रताप सिंह
मुख्य चिकित्सा अधिकारी