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युद्ध के हालात में यूक्रेन के लोगों का हौसला बढ़ाती रही ललितपुर की बेटी

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झांसी। यूक्रेन में ललितपुर की एक बेटी ने अपने हौसले के दम पर अपने साथियों के साथ-साथ यूक्रेन के लोगों को भी हिम्मत दी। बेटी ने हमले के हालात में यूक्रेन के लोगों को सुरक्षा उपायों के प्रति सतर्क किया। यूक्रेन में हमले के दौरान लोगों को सचेत करने में बिटिया के लिए स्कूल के समय में लिया गया एनसीसी प्रशिक्षण बेहद काम आया। एनसीसी केडेट बिटिया यूक्रेन में फंसे रहने से पर परिजनों को भी हिम्मत देती रही।
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ललितपुर के पाली निवासी संजय नामदेव का परिवार बुलंदशहर में रहता है। संजय की बेटी अंजली यूक्रेन के ल्वीव शहर के एक विवि से मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। यूक्रेन पर जब रूस ने हमला किया, तो अंजली के परिवारीजन चिंतित हो गए। मगर साहसी बिटिया मुश्किल हालात में अपने देश के साथियों के साथ यूक्रेन के लोगों की मदद कर रही थी। अंजली बताती हैं कि जब वे डीपीएस बुलंदशहर में पढ़ती थीं, तब उन्होंने एनसीसी में हिस्सा लिया। इस दौरान मिले प्रशिक्षण उनके बेहद काम आए। अंजली ने बताया कि यूक्रेन में उनके भारतीय साथियों को सायरन बजने के बाद क्या करना है, कैसे बंकर में जाना है, इसकी जानकारी नहीं थी। वे यूक्रेन के एक टेलीग्राम ग्रुप में आने वाले सायरन बजने के संदेशों को अपने दोस्तों को बताती थीं। इसके अलाव उन्होंने अपने दोस्तों को बंकर में छिपने और सायरन बजने पर सुरक्षा उपाय अपनाने की ट्रिक भी सिखाई। अंजली ने बताया कि भारत आने से करीब चार दिन पहले वे अपने कॉलेज के पास गईं, तो उन्होंने वहां मिसाइल के चिह्न देखे। जिसके बारे में वहां घूम रहे यूक्रेनियन को पता नहीं था। उन्होंने जैसे ही चिह्न देखे, तो सभी को जागरूक करके वहां से हटाया। इसके अलावा वे अपने परिवारी जनों का भी हौसला बढ़ाती रहीं।
भारत का झंडा लगी कार में थी तो दिक्कत नहीं हुई
अंजली ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद उससे एंबेसी के अधिकारियों ने पोलैंड पहुंचने के लिए कहा। उसके हॉस्टल से पोलैंड बॉर्डर 70 किलोमीटर दूर था। जब वह निकली तो कार में भारत का झंडा लगा हुआ था। ऐसे में चेक पोस्ट पर रूस की सेना ने उसकी कार को नहीं रोका। दो घंटे में ही वो पोलैंड बॉर्डर पहुंच गई। जबकि, नाइजीरिया समेत दूसरे देशों के छात्रों के साथ काफी पूछताछ हुई। उन्हें बॉर्डर पहुंचने में कई-कई घंटे लग गए। एंबेसी के अधिकारियों ने उसके रहने, खाने की अच्छी व्यवस्था की।
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पिता ने पीएम राहत कोष में दिए 30 हजार रुपये
ललितपुर/पाली। यूक्रेन और रुस के बीच शुरू हुई जंग के बीच से अंजली के वापस लौटने पर उसके पिता ने प्रधानमंत्री राहत कोष में 30 हजार रुपये का योगदान दिया। युद्ध को लेकर पाली में रहने वाले अंजली के बाबा बालचंद नामदेव व अन्य परिजन वहां हो रहे घटनाक्रम को देख-देखकर परेशान हो रहे थे। बृहस्पतिवार को अंजली सकुशल वापस अपने घर बुलंदशहर पहुंच गई। जानकारी मिलते ही उसके अन्य परिजनों ने उससे वीडियो कॉलिंग कर हालचाल जाना। अंजली के पापा संजय नामदेव ने मोबाइल पर बताया कि यूक्रेन में फंसी बिटिया की चिंता में 10 दिन बहुत कठिनाई में बीते। वो निरंतर उससे संपर्क में रहे। मां रूबी नामदेव ने बताया कि अंजली ने इस तरह की परिस्थितियों में भी अपना और परिवार के सभी सदस्यों का मनोबल बनाए रखा। हमें अपनी बेटी पर गर्व है। खुशी के अवसर पर अंजली के पिता संजय नामदेव ने अपनी बेटी अंजली के हाथों प्रधानमंत्री राहत कोष में तीस हजार रुपये का योगदान दिया। अंजली के चाचा संतोष नामदेव ने भी भतीजी के सकुशल लौटने पर खुशी जताई।
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