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दो साल से कोविड ड्यूटी में लगा लैब टेकभनीशियन, जांच को भटक रहे मरीज

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ललितपुर। स्वास्थ्य विभाग में कोविड ड्यूटी के नाम पर कर्मचारियों की मनमानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। जिला अस्पताल में तैनात एक लैब टेकभनीशियन दो साल से कोविड ड्यूटी बताकर गायब है। हालात यह हैं कि लैब टेकभनीशियन नहीं होने से अस्पताल की पैथोलॉजी में जांचों का काम प्रभावित है। यहां पर ग्लूकोमीटर होने के बाद भी मरीजों को सैंपल देने के अगले दिन रिपोर्ट मिल पाती है। जबकि अस्पताल का कोविड वार्ड खाली पड़ा है। अधिकारी भी लैब टेकभनीशियन की कोविड ड्यूटी को लेकर मौन साधे हुए हैं।
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जिला अस्पताल में कोविड काल से बेपटरी हुईं स्वास्थ्य सेवाएं दो वर्ष बाद भी दुरुस्त नहीं हो पाई हैं। जिले में कोविड का प्रकोप भले की कम हो गया हो, लेकिन पैथोलॉजी में तैनात कर्मचारियों की वापसी नहीं हो पाई है। ऐसे में पैथोलॉजी में सामान्य जांचें तक प्रभावित बनी हुईं हैं। मरीजों की शुगर की स्क्रीनिंग तक नहीं हो पा रही है।
आलम यह है कि अस्पताल में ओपीडी में पहुंचने के लिए मरीजों को पर्चा काउंटर पर पंजीयन कराने के बाद कोविड जांच कराना होती है। इसके बाद रिपोर्ट आने पर निगेटिव की पर्ची लेकर चिकित्सक के पास पहुंचते हैं। जिस पर चिकित्सक जांच लिखते हैं। सैंपल देने की प्रक्रिया तक लगभग डेढ़ घंटे का समय लग जाता है। सैंपल देने के बाद रिपोर्ट दोपहर बाद मिलती है। तब तक ओपीडी का समय खत्म हो चुका होता है। सबसे ज्यादा दिक्कत को मरीजों को शुगर की जांच कराने में होती है। पैथोलॉजी में टेकभनीशियन नहीं होने से 10 मिनट में ग्लूकोमीटर से होने वाली शुगर की जांच के लिए मरीजों को सैंपल देना पड़ता है और रिपोर्ट अगले दिन मिल पाती है। ऐसे में मरीजों को एक दिन जांच के लिए तो दूसरे दिन उपचार के लिए आना पड़ता है। जिम्मेदार कर्मचारी की कहां कोविड में ड्यूटी है, इस बारे में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
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आंख के ऑपरेशन के मरीज हो रहे परेशान
जिला अस्पताल में सर्दी के मौसम में आंख के ऑपरेशन के लिए भी अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इन मरीजों को ऑपरेशन से पहले शुगर की जांच अधिक आवश्यक है, लेकिन अस्पताल में ग्लूकोस्ट्रिप से जांच न होने से उसी दिन ऑपरेेशन नहीं हो पा रहा है।
दो प्रकार से होती शुगर की जांच
शुगर की जांच दो प्रकार की होती है। इनमें तीन माह वाली शुगर की जांच के लिए मरीजों को सैंपल पैथोलॉजी में देना होता है। इसकी रिपोर्ट लगभग दो घंटे में आती है। वहीं ग्लूकोस्ट्रिप से तुरंत जांच हो जाती है। इससे मरीज की स्क्रीनिंग हो जाती है। साथ ही खाली पेट और खाना खाने के बाद होने वाली जांच भी ग्लूकोस्ट्रिप से होती है, लेकिन जिला अस्पताल में दो वर्ष से ग्लूकोस्ट्रिप से जांच नहीं हो रही है।
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अपनी मां की शुगर जांच कराने आए थे, सैंपल दे दिया अब सोमवार को रिपोर्ट मिलने की कह रहे हैं। जबकि मां दर्द से परेशान हैं।
- अमित
जिला अस्पताल में ग्लूकोस्ट्रिप से जांच बंद होने से अधिक समस्या हो गई है। अब मरीजों की स्क्रीनिंग तक नहीं हो पा रही है।
- महेंद्र राजपूत
जिला अस्पताल में ग्लूकोस्ट्रिप से शुगर की जांच न होने की जानकारी हुई है। इस पर सीएमएस से संपर्क कर ग्लूकोस्ट्रिप से जांच शुरू कराई जाएगी।
- डॉ. जीपी शुक्ला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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