बार (ललितपुर)। जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर और कस्बा बार से 15 किलोमीटर तालबेहट ब्लॉक के रजपुरा गांव के समीप अमरनाथ मंदिर अपने आप में अद्वितीय है। मंदिर में शिवलिंग प्राकृतिक है। संतान की चाहत में लोगों द्वारा मनोकामना पूरी होने के उपरांत भगवान के मंदिर में झूमर चढ़ाने के कारण इस सिद्ध स्थल का नाम झूमरनाथ महादेव धाम पड़ा। सैकड़ों वर्ष पूर्व लोग बांस में लोटा बांधकर भगवान भोलेनाथ पर जल चढ़ाते थे। अब अमरनाथ गुफा में लोगों के जाने से यहां के लोग अब पिंडी को स्पर्श कर आशीर्वाद लेते हैं।
स्थानीय लोगों की मानें तो सैकड़ों वर्ष पूर्व ग्राम पंचायत पारौन के पाठक परिवार के मुखिया परम शिवभक्त थे। एक बार उन्हें स्वप्न आया कि रजपुरा गांव से एक किलोमीटर दूर पत्थरों में शिव जी विराजमान हैं और उनकी पूजा करने को कहा गया। यह बात उन्होंने ग्राम पारौन और रजपुरा के जमींदारों को बताई। लोगों ने वहां जाकर देखा तो वहां पत्थर की छोटी गुफा थी और उसमें जाना काफी मुश्किल था। झाड़ियां भी उगी हुई थीं। स्थानीय लोगों ने अथक प्रयास कर झाड़ियां साफ कीं और छोटे-छोटे पत्थरों को हटाकर गुफा में पहुंचे। वहां प्राकृतिक शिवलिंग देख लोग अचंभित रह गए। गुफा के छोटी होने के कारण वहां जल चढ़ाना काफी मुश्किल था तो लोगों ने बांस के डंडे में लोटा बांधकर जल चढ़ाना शुरू किया। बाद में गुफा अपने अप बढ़ने लगी और वर्तमान मेें लोग शिवलिंग तक पहुंचकर पूजा अर्चना करते हैं।
संतान चाहत की मनोकामना पूर्ण होने पर लोग यहां चढ़ाते हैं झूमर
बुंदेलखंड में अमरनाथ के नाम से प्रसिद्ध यह शिवलिंग लोगों की आस्था का केंद्र रहा है। संतान चाहत को लेकर मन्नत मांगने वालों की मनोकामना पूर्ण हुई तो लोगों ने यहां बाबा को झूमर चढ़ाना शुरू किया, जिससे शिव जी झूमर अमरनाथ के नाम से प्रसिद्ध हो गए और मंदिर का नाम ही झूमरनाथ मंदिर पड़ गया।
बाबा झूमर नाथ का मंदिर बहुत पुराना प्राकृतिक सिद्ध स्थान है। यह रमणीक स्थल जंगल में होने के कारण साधु संतों का आगमन रोजाना होता रकहता है एवं यज्ञ हवन संपन्न होते रहते हैं। इस स्थान का महापर्व महाशिवरात्रि वेद शास्त्र विधि एवं विद्वान पंडितों द्वारा प्रतिवर्ष भव्य रुप से मनाया जाता है।
- चंद्रशेखर दास महराजा, पुजारी, झूमरनाथ महादेव धाम
बाबा झूमरनाथ महादेव जी की गुफा का आकार प्रति वर्ष एक चावल के बराबर बढ़ता है। तत्कालीन समय में जहां लोग गुफा में प्रवेश नहीं कर पाते थे, वर्तमान में शिवलिंग को स्पर्श कर रहे हैं।
- गजेंद्र सिंह बुंदेला, पूर्व ग्राम प्रधान भेलोनी सुवा