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काश, अफसर सुन लेते तो बच जाता राजकुमार

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ललितपुर। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अफसरों को फरियादियों की शिकायत का त्वरित निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन जिला स्तर पर फरियादियों की शिकायतें नहीं सुनी जा रही हैं। सीएम आवास की दीवार से गिरने से हुई राजकुमार की मौत इसकी हकीकत बयां कर रही है। बीते एक महीने से अपनी फरियाद लेकर रहनुमाओं के चक्कर लगा रहे राजकुमार को अगर न्याय मिल जाता, तो आज वह जिंदा होता। मगर अफसरों और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी उसकी जान का सबब बन गई।
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सरकार ने शिकायतों के निस्तारण के लिए तमाम इंतजामात किए हैं। आईजीआरएस पोर्टल, शिकायत पेटिका समेत तमाम प्रबंध हैं। इन पर रोज सैकड़ों शिकायतें दर्ज भी होती हैं, लेकिन निस्तारण फिर भी नहीं होता। हालांकि सरकार ने निस्तारण के लिए अफसरों की जवाबदेही तय की है, लेकिन जल्दी के चक्कर में फ ौरी रिपोर्ट लगाकर निस्तारण कर दिया जाता है। जिले में बड़ी संख्या में आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायते लंबित हैं। वहीं दफ्तरों की शिकायत पेटिकाओं का हाल भी कुछ ऐसा ही है। गांव उदयपुरा का राजकुमार भी अपनी शिकायत लेकर अफसरों के चक्कर लगाता रहा, लेकिन किसी ने सुनी ही नहीं।
जमीन तो गई ही बेटा भी चला गया
बेटे का शव लेने लखनऊ गए अच्छेलाल और चाचा ललित ने बताया कि ग्राम प्रधान राम रतन सिंह यादव ने चुनाव में सपा को वोट देने को कहा था। लेकिन पूरा गांव भाजपा को वोट दे रहा था, इसलिए उनके परिवार ने भी भाजपा को वोट दिया। इससे नाराज प्रधान ने घर में घुसकर पूरे परिवार की पिटाई की। यही नहीं घर के बगल की जिस जमीन पर वे मकान बनवा रहे थे, प्रधान ने उस पर कब्जा कर लिया। थाने से लेकर एसपी तक ने सुनवाई नहीं की तो बेटा फरियाद लेकर मुख्यमंत्री के पास आया था।
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सिर व कान से निकल रहा था खून
राजकुमार के शव का पोस्टमार्टम हुआ तो सिर में बायीं तरफ गंभीर चोट के निशान मिले। डॉक्टरों के मुताबिक किसी भारी चीज से सिर पर चोट लगने से ऐसा हो सकता है। राजकुमार के दाएं कान से खून निकला हुआ था। इसे भी डॉक्टर मारपीट की वजह से बता रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि राजकुमार को पुलिस सोमवार को थाने ले गई थी। हालांकि, गौतमपल्ली इंस्पेक्टर सुखवीर सिंह भदौरिया के मुताबिक बाउंड्री से गिरने से चोट लगने की जानकारी है।
पुलिस ने कर दी थी धारा 151 की कार्रवाई
पुलिस से की, तो पुलिस ने उल्टा उसके खिलाफ ही 151 की कार्रवाई कर दी। आरोप है कि उसने इसकी शिकायत स्थानीय स्तर पर थाना प्रभारी, पुलिस अधीक्षक, राज्यमंत्री से भी की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद वह बीच में एक दिन घंटाघर के मैदान में भी धरने पर बैठ गया था, मगर उसे न्याय नहीं मिला। मौत की जानकारी मिलने पर अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। परिजन लखनऊ गए हैं। संभावना है कि परिजन उसके शव को ललितपुर स्थित गांव लाकर उसका अंतिम संस्कार करेंगे।
ग्राम प्रधान ने भी किया था सीएम आवास पर फांसी लगाने का प्रयास
ग्राम बछलापुर निवासी रामराजा कुशवाहा (35) ने कर्ज से परेशान होकर करीब साढ़े चार साले पहले लखनऊ में सीएम आवास के सामने फांसी लगाने का प्रयास किया था। उसे भी तब लोगों ने किसी प्रकार बचा लिया था। वह अपने समस्या लेकर झांसी में सीएम के कार्यक्रम में भी पहुंचा था, लेकिन वहां सीएम योगी से मुलाकात नहीं हो सकी थी, जिसके बाद वह सीधा लखनऊ पहुंच गया था, जहां वह सीएम आवास के सामने जामुन के पेड़ पर फांसी के फंदे पर लटक गया था, तब वहां मौजूद लोगों ने उसे किसी प्रकार उतारकर बचा लिया था। इस मामले की सूचना मिलने पर पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने रामराजा को बाद में लखनऊ बुलाकर उसे दो लाख रुपये नकद देकर मदद की थी। बाद में वही रामराजा कुशवाहा गांव का ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ा और जीता भी था।
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कलक्ट्रेट परिसर में पेड़ से लटक गया था किसान
थाना पाली के ग्राम बछलापुर निवासी प्रेमचंद्र कुशवाहा के पुत्र रामपाल का अपने चचेरे भाइयों से जमीन बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था। रामपाल की पत्नी सोना रानी के अनुसार एक नवंबर को सुबह 11 बजे चाचा के लड़के और परिवार की महिलाओं ने घर आकर गाली गलौज की। कहा यदि खेत की जुताई की तो जान से मार देंगे। जब उसने गालियां देने से मना किया तो उन लोगों ने उसकी व पति की पिटाई की। इससे दोनों को चोटें आईं। मामले की सूचना पुलिस को दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। चिकित्सकीय परीक्षण भी नहीं कराया। इसके बाद उसने तीन नवंबर को पुलिस अधीक्षक से भी शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। जिस पर प्रेमचंद कुशवाहा ने बीते पांच माह पूर्व 29 नवंबर को कलक्ट्रेट परिसर स्थित पेड़ पर फांसी के फंदे पर झूल गया, जिस पर आसपास मौजूद लोगों ने किसी प्रकार उसे उतारा था और डीएम के निर्देश पर अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने उसके गांव पहुंचकर उसकी जमीन के विवाद का निपटारा कराया था।
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