ललितपुर। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में घनी बस्ती से निकले बिना गार्डिंगयुक्त हाईटेंशन बिजली के तार खतरा बने हुए हैं। स्थिति यह है कि कई बार हाईटेंशन तार गिरने की वजह से लोगों की जान जा चुकी है, घरों और दुकानों में हाईटेंशन करंट दौड़ने से गंभीर हादसे हो चुके हैं, लेकिन विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि घनी बस्तियों के ऊपर से हाईटेंशन लाइनें बिना गार्डिंग के निकली हुई हैं।
विद्युत विभाग द्वारा शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों को विद्युत आपूर्ति प्रदान करने के लिए 11 हजार केवी व 33 हजार केवी की हाईटेंशन लाइनों का जाल बिछाया गया है, जो मुख्य सड़कों व गली- मुहल्लों से होकर गुजरती हैं। विभाग द्वारा नियमत: हाईटेंशन लाइनों के बिछाने के दौरान ही इन लाइनों के नीचे दोनों विद्युत खंभों के बीच में दूरी के अंतराल पर एक या डेढ़ फुट नीचे गार्डिंग लगाई जाती है। गार्डिंग टूटने या गिरने पर बदलने का प्रावधान रखा गया है। लेकिन, शहर में बहुत से स्थानों पर गार्डिंग टूटने या गिरने पर वर्षों से नहीं बदला जा सका है, जिसकी वजह से गंभीर हादसे होते रहते हैं।
करीब डेढ़ वर्ष पूर्व मुहल्ला नदीपुरा में कैलगुवां रोड पर हाईटेंशन तार जमीन पर गिरने से एक टायर की दुकान में आग लग गई थी, जबकि दो वर्ष पूर्व ग्राम जखौरा अंतर्गत ग्राम ननौरा निवासी तीन किसानों की नहर किनारे हाईटेंशन तार टूटकर गिरने से मौत हो गई थी। विभाग द्वारा विद्युत दुर्घटना में घायलों या मृतकों को मुआवजा तो वितरित कर दिया जाता है, लेकिन विद्युत प्रणाली में सुधार नहीं किया जा रहा है।
इस वजह से अब भी बिना गार्डिंग के बिछाए गए हाईटेंशन तारों से खतरा बरकरार बना हुआ है। शहर में ही स्टेशन क्षेत्र, तालाबपुरा, नदीपुरा, गल्लामंडी क्षेत्र आदि बहुत से स्थानों पर हाईटेंशन लाइनों के किनारे गार्डिंग नहीं है, जिसकी वजह से यहां प्रमुख चौराहों व मुख्य सड़कों से निकली हाईटेंशन लाइनों का हर पल
खतरा बना हुुआ है।
विभागीय लापरवाही का आलम ही है कि रविवार को ग्राम सौंरई में हाईटेंशन तार के ट्रांसफार्मर से झुकने की वजह से घरों में करंट दौड़ गया था, जिसकी वजह से आधा दर्जन लोग झुलस गए थे और लाखों रुपए के विद्युत उपकरण फुंक गए थे।
क्रासिंग या घनी बस्तियों वालेे क्षेत्रों से 11 व 33 हजार केवी विद्युत लाइन के नीचे गार्डिंग लगाए जाने के लिए शहर के अवर अभियंताओं को स्टीमेट बनाकर उपखंड कार्यालय में प्रस्तुत करने के लिए पत्र लिखा गया है। स्टीमेट प्राप्त होते ही गार्डिंग की डिमांड की जाएगी और हाईटेंशन तारों के नीचे गार्डिंग लगवाई जाएगी।
- अखिलेश कुमार वर्मा, उपखंड अधिकारी प्रथम, विद्युत।