राज्यपाल आनंदी बेन पटेल बृहस्पतिवार को जनपद पहुंचीं और राजकीय महाविद्यालय के सभागार में 160 आंगनबाड़ी केंद्रों को विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से दी जाने वाली प्री-स्कूल किट का वितरण किया। इसके साथ ही उन्होंने वृद्धाश्रम के लिए 2.08 लाख रुपये की लागत से जरूरी सामान का भी वितरण किया। इसके बाद उन्होंने जिला कारागार में पहुंचकर महिला बंदियों से मुलाकात की।
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल बृहस्पतिवार को शाम को सवा चार बजे पुलिस लाइन परिसर में बने हेलीपैड पर पहुंची, जहां से वह कुछ समय के लिए लोक निर्माण विभाग के रेस्ट हाउस गईं और वहां से वह सीधे राजकीय इंटर कॉलेज पहुंचीं, जहां उन्होंने सबसे पहले विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए आठ स्टॉलों का अवलोकन किया। इसके बाद वह कॉलेज के सभागार में पहुंचीं।
कार्यक्रम में उन्होंने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष माल्यार्पण किया। इसके बाद उन्होंने यहां आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ताओं एक डेमो चेक सौंपा और दस आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ताओं के लिए प्री-स्कूल किट का वितरण किया।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ता भी खुद को डीएम समझकर अपना कार्य करें और ग्राम प्रधान खुद को मंत्री समझें और अपना काम लगन से करें। उन्होंने कहा कि मेरा गांव कुपोषण मुक्त हो इसके लिए संकल्प लें। उन्होंने कहा कि यदि एक भी बच्चा कुपोषित है तो उस पर काम करें जिससे कोई भी बच्चा कुपोषित न रहे। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहुंचने वाले बच्चों के लिए ग्राम प्रधान, किसान व ग्रामीण सहयोग करें। छोटी-छोटी चीजों, सब्जी आदि के लिए कोई मना न करे।
उन्होंने यहां कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने टीबी को विश्व से खत्म करने के लिए 2030 तक का समय रखा, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वह इतना इंतजार नहीं कर सकते हैं और उन्होंने 2025 तक भारत को कुपोषित मुक्त करने का संकल्प लिया है। यदि आसपास कोई टीबी का मरीज है तो उसके लिए चने, मूंगफली देते रहें तो वह गांव छह माह में टीबी से मुक्त हो सकेगा।