तालबेहट। जनपद की प्रमुख तहसील में शुमार रखने वाली तालबेहट तहसील कुछ समय से कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है। काम के बोझ के चलते कर्मचारी भी लोगों की समस्या निपटाने में मन से काम नहीं कर पा रहे है। वहीं कई पटलों का काम तो दो-दो सप्ताह में भी नहीं हो रहा है। इससे लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए कर्मचारियों की तैनाती कराने की मांग की है।
जनपद में पहले तीन तहसील थीं। कुछ वर्ष पहले मड़ावरा और पाली के बनने से इनकी संख्या पांच हो गई है। इसके बाद तालबेहट तहसील में कर्मचारियों का अभाव सा हो गया। धीरे-धीरे कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने और कुछ के स्थानांतरण होने के बाद उनके स्थान पर अन्य कर्मचारियों को भेजा नहीं गया। जिससे यहां कर्मचारियों की संख्या दिन प्रति दिन कम होती गई। जिसका खामियाजा यहां के किसानों एवं लोगों को उठाना पड़ रहा है। मामूली से मामूली काम में यहां दो सप्ताह का समय लगना आम बात है। लोगों की परेशानी सुनने वाले अधिकारी भी कर्मचारियों की कमी का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।
वर्तमान में तहसील में समाधान दिवस के शिकायती पत्रों को ऑनलाइन पंजीकरण करने के लिए कोई नहीं है। जो पूर्व में काम कर रहा था। उसे मानदेय को लेकर हुए विवाद के बाद अधिकारियों ने हटा दिया गया। तब से तहसील में कोई नहीं है।
तहसील में 59 राजस्व गांवों के लिए मात्र 38 लेखपाल काम कर रहे हैं। जिसमें दो लेखपालों को कार्यालय से संबंध कर काम लिया जा रहा है।
तहसील में सबसे अधिक परेशानी राजस्व निरीक्षकों को लेकर है। आधा दर्जन परगना होने के बाबजूद वर्तमान में मात्र दो राजस्व निरीक्षक यहां पर काम कर रहे है। जिन पर काम के अलावा वीआईपी डयूटी का भार रहता है। जिसके कारण राजस्व संबंधी कार्य के लिए उन्हें समय निकाल पाते है। तीन रजिस्ट्रार कानूनगो के सापेेक्ष मात्र दो ही यहां काम कर हैं। कर्मचारियों की कमी के कारण लोगों को भारी परेेशानी हो रही है। वहीं, कर्मचारियों की कमी के चलते तहसील में इस समय न्यायालयों तक में प्राइवेट लड़कों से काम लिया जा रहा है। कई कर्मचारी दो दो पटलों का काम संभाल रहे हैं। इसके बावजूद काम समय से नहीं हो पा रहा है।
काम की अधिकता को देखते हुए कर्मचारियों की तैनाती होना चाहिए। संविदा पर हुई भर्ती निरस्त होने और स्थाई भर्ती न होने के कारण ऐसी समस्या आ रही है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को कई बार अधिकारियों द्वारा अवगत कराया जा चुका है।
अखिलेश गुप्ता, तहसीलदार तालबेहट
मालकान और बंधक नहीं हो रहे हैं दो-दो सप्ताह तक
तालबेहट। इस समय किसान बैंक से क्रेडिट कार्ड बनवा रहे है। जिसके लिए डीड को बंधक कराने और मुक्त कराने के लिए तहसील में आना पड़ता है। लेकिन तहसील में दो दो सप्ताह तक न तो बंधक दर्ज की जा रही है और न ही उसे मुक्त किया जा रहा है। वहीं दाखिल खारिज के मालिकाना में भी काफी समय लग रहा है।