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सहनशीलता, समता और धैर्य जीवन में श्रेयस्कर: आर्यिका आदर्शमति

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जैन नया मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए आर्यिका आदर्शमति माता जी - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। आर्यिकारत्न आदर्शमति माता जी ने कहा कि प्रतिकूलता में क्रोध और अनुकूलता में मान होना व्यक्ति का स्वभाव है। जब कोई व्यक्ति किसी काम में असफल हो जाता है तो वह उन स्थितियों में क्रोधित हो उठता है जिन्हें वह असफलता का कारण समझता है। सफल होने पर सफलता का श्रेय स्वयं लेकर अभिमान करने लगता है। वह शनिवार को दिगंबर जैन नया मंदिर में धर्म सभा को संबोधित कर रहीं थी।
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उन्होंने पर्यूषण पर्व के मार्दव धर्म पर कहा कि अकड़, अहंकार, घमंड, गर्व, अभिमान ये सब एक ही बात है। जब मार्दव धर्म हृदय में उतरता है तो यह सब हृदय से पलायन कर जाती है। यदि आपके पास मार्दव गुण है तो सारी दुनिया आपके सामने झुकने को तैयार हो जाएगी।
आर्यिका पृथ्वीमति माता जी ने सहनशीलता, समता, धैर्य और क्षमा का श्रेष्ठ गुण आपके जीवन में आना ही श्रेयस्कर बताया। धर्मसभा के प्रारंभ में आचार्य श्री विद्यासागर पाठशाला की छात्रा अनोखी ने तत्वार्थसूत्र का वाचन एवं अर्घ समर्पण रवींद्र जैन चंदावली परिवार द्वारा किया। मंगलाचरण की प्रस्तुति पाठशाला परिवार की बालिकाओं ने भक्तिपवूर्वक प्रस्तुत की। इस मौके पर सुरेंद्र जैन मोदी, जैन पंचायत अध्यक्ष अनिल जैन अंचल, मनोज जैन,अभिषेक, अक्षय अलया, मनोज, वीरेंद, जिनेंद्र जैन, महेंद्र चौधरी, कैलाश सराफ, सुबोध जैन ,अभय जैन, जितेंद्र जैन राजू, सुवेंदु जैन, अजित कुमार जैन मौजूद रहे।
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सब प्राणियों के प्रति मैत्री भाव रखें
ललितपुर। जैन अटामंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका दुर्लभमति माता जी ने ने कहा कि सबसे विनम्र भाव से पेश आएं। सब प्राणियों के प्रति मैत्री भाव रखें, क्योंकि सभी प्राणियों को जीवन जीने का अधिकार है। शनिवार सुबह नगर के जैन अतिशय क्षेत्र क्षेत्रपाल जी, जैन अटामंदिर, बडा मंदिर वहुवलि नगर, नईवस्ती आदिनाथ मंदिर, चंद्रप्रभु मंदिर डोसजयाघाट, शांतिनगर मंदिर, गांधीनगर इलाइट जैन मंदिर, सिविल लाइन जैन मंदिर, एंबोशिया कालोनी में जैन श्रावक-श्राविकाओं ने पर्यूषण पर्व पर अभिषेक शांतिधारा पूजा अर्चना की। उधर, जैन अटा मंदिर में धर्म सभा के प्रारंभ में तत्वार्थसूत्र का वाचन मुनि संघ के सानिध्य में मोहनी जैन द्वारा किया गया और अर्घ्य जैन अहिंसा मंच के प्रभात जैन लागौन परिवार द्वारा समर्पित किए। एम्ब्रोशिया जैन मंदिर में वीणा जैन के संयोजन में नृत्य प्रतियोगिता हुई। जिसमें प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया।
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मड़ावरा: मार्दव धर्म पर प्रवचन करती आर्यिका श्री
मड़ावरा। ग्यारह जिनालयों की नगरी मड़ावरा में पर्वों में श्रेष्ठ पर्वराज पर्यूषण पर्व के द्वितीय दिन उत्तम मार्दव धर्म के अवसर पर नगर के जिनालयों में प्रात:काल श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, विधान हुए।
शनिवार को श्रीजी की शांतिधारा करने का सौभाग्य अक्षयमति माताजी के गृहस्थ परिवार एवं सिंघई धीरेंद्र जैन, सुनील सिंघई, धर्मेंद्र सराफ, संस्कार सराफ को मिला। आर्यिकाश्री अक्षयमति माता जी ने कहा कि जो ज्ञानी कुल, रूप, जाति, बुद्धि, तप, शास्त्र, शीलादि के विषय में किंचित मात्र भी घमंड नहीं करता है वह सच्चे मार्दव धर्म का पालन करता है। कार्यक्रम का संचालन डॉ राकेश सिंघई एवं प्रदीप जैन ने संयुक्त रुप से किया।
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