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नेपाल के हाथियों का दुधवा में डेरा, किसान परेशान

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दुधवा टाइगर रिजर्व में घूमते हाथी। फाइल फोटो - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। नेपाल के हाथियों को दुधवा का जंगल काफी भा रहा है। यही कारण है कि आए दिन हाथियों के झुंड नेपाल के जंगल से निकलकर दुधवा के जंगल में आ रहे हैं। नेपाल के हाथियों को दुधवा का जंगल रास आने के पीछे कई कारण हैं। इसमें नेपाल में जंगलों का सफाया, दूसरा यहां की समृद्ध पारिस्थितिकी और अनुकूल वातावरण है। एक ओर नेपाल के हाथियों को दुधवा भा रहा है वहीं दूसरी ओर जंगल के किनारे खेती करने वाले किसानों की जान सांसत में है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व और नेपाल के जंगलों की पारिस्थितिकी लगभग एक सी है लेकिन पिछले कुछ दशकों से नेपाल में जंगलों को तेजी से काटा गया है। हालत यह है कि हाथी, गैंडा और दूसरे वन्यजीवों के लिए प्राकृतिवास और भोजन का संकट पैदा हो रहा है। नदियां सूख रहीं हैं जिससे वन्यजीवों के लिए संकट बढ़ रहा है। रही सही कसर नेपाली नदियों में आने वाली बाढ़ ने पूरी कर दी है। ऐसे में हाथी अपना ठिकाना बदलने को मजबूर हैं। हाथी हमेशा उन्हीं जगहों पर जाते हैं जहां उनके पुरखे पहले आते जाते रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हाथियों में जेनेटिक मेमोरी होती है। जिसके सहारे अपने पूर्वजों के रास्ते को अपना कर चलते हैं।
अब नेपाली हाथी दुधवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत टाइगर रिजर्व को अपना नया ठिकाना बना रहे हैं। यहां इन्हें खाने के लिए भरपूर चारे के साथ पर्याप्त पानी और अनुकूल प्राकृतिवास मिल रहा है। यह हाथी कुछ समय प्रवास के करने के बाद वापस चले जाते हैं तो कभी कभी यहीं के होकर रह जाते हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में दुधवा टाइगर रिजर्व में हाथियों की संख्या में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर का कहना है कि इस समय दुधवा टाइगर रिजर्व में हाथियों की संख्या 149 है।
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मौजूदा समय में भी है नेपाली हाथियों का डेरा
करीब दो माह से नेपाल के शुक्लाफांटा वन्यजीव विहार से निकले हाथियों के दल ने दुधवा टाइगर रिजर्व में डेरा डाल रखा है। दो माह पहले 16 जुलाई को नेपाल से हाथियों का यह झ़ुंड नदी पार कर संपूर्णानगर रेंज के रास्ते दुधवा टाइगर रिजर्व में दाखिल हुआ था। करीब 16 हाथियों का यह झुंड कुछ दिन दुधवा के जंगल में रहने के बाद पीलीभीत टाइगर रिजर्व में कूच कर गया। करीब एक माह तक वहां प्रवास करने के बाद तीन चार दिन पहले फिर दुधवा टाइगर रिजर्व आ पहुंचा। इस समय यह हाथी बफर जोन के महुरेना जंगल में डेरा डाले हुए हैं।
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किसानों के लिए आफत बने हाथी
नेपाल से आए यह जंगली हाथी किसानों के लिए आफत बने हुए हैं। रात के समय यह हाथी जंगल से सटे खेतों में जाकर किसानों की फसलें उजाड़ रहे हैं। पिछले दो माह के अंदर यह हाथी 50 से अधिक किसानों के खेतों में खड़ी धान और गन्ने की फसलों को तबाह कर चुके हैं। हालांकि वन विभाग हाथियों से होने वाले फसलों के नुकसान का मुआवजा देता है लेकिन इस मुआवजे को मिलने में काफी समय लग जाता है। ग्रामीणों का कहना है जंगली हाथियों के आने से बाघ और तेंदुए भी असहज होकर जंगल से बाहर आकर पालतू पशुओं पर हमला कर रहे हैं।
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नेपाल के जंगल से निकलकर करीब 16 जंगली हाथियों का एक दल इन दिनों दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल में डेरा डाले हुए है। नेपाल से हाथियों का आए दिन दुधवा के जंगल में आना जाना रहता है। यह हाथी किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे है। इसके बदले किसानों को नियमानुसार नुकसान का मुआवजा दिया जाएगा।
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-संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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