लखीमपुर खीरी। हाईप्रोफाइल मामले की तैयारी के साथ विवेचक विद्याराम दिवाकर पूरी टीम के साथ तैयारी से आए थे। जांच टीम की ओर से सीओ संदीप सिंह, एसपीओ एसपी यादव के साथ ही जांच के अफसर भी कोर्ट रूम में मौजूद थे। सिलसिलेवार ढंग से केस डायरियों को इंडेक्स के रूप में रखा गया। अभियोजन केस रखने के लिए डीजीसी अरविंद त्रिपाठी के पीछे ही क्राइम ब्रांच प्रभारी विद्याराम दिवाकर कोर्ट रूम में मौजूद रहे, जो बचाव पक्ष की ओर से उठाई जा रही दलीलों को काटने के लिए तुरंत ही डीजीसी के कान में बताते रहे कि अमुक केस डायरी के फलां पेज पर यह विवरण अंकित है, जिसे बस्ते से निकालकर कोर्ट के समक्ष रखने के लिए सीओ संदीप सिंह को बताते रहे जिस पर केस डायरी न्यायाधीश के समक्ष रखी जाती।
बहस के दौरान बचाव पक्ष केस डायरी जानने को बेताब रहा बचाव पक्ष
लखीमपुर खीरी। जमानत अर्जी की सुनवाई के दौरान आशीष पांडेय और लवकुश राना की ओर से पेश बचाव पक्ष के वकीलों ने झूठा फंसाए जाने की दलील दी, साथ ही कहा उनका कोई मोटिव भी नही है, न ही वह घटनास्थल से पकडे़ गए हैं। इसके खिलाफ जब अभियोजन पक्ष की ओर से बताया कि घटनास्थल पर सीओ गोला, एसडीएम गोला और सीओ मितौली भी मौजूद रहे। इसके अलावा परगट सिंह सहित चार गवाहों ने चक्षुदर्शी साक्ष्य दिए है, जो केस डायरी में नोट है। यह कहते हुए अभियोजन पक्ष की ओर से केस डायरी में लिखी बातों का जवाब देने के लिए केस डायरी देखने अथवा उनका विवरण पढ़कर बताने की बात कही। लेकिन अदालत ने कहा आप अपना बचाव पक्ष रखें, अभियोजन केस डायरी में जो लिखा है वह स्वयं अदालत पढ़ लेंगी।
असलहों से हुई थी फायरिंग, फोटोग्राफ्स बने आधार
लखीमपुर खीरी। जमानत अर्जी के दौरान बचाव पक्ष की ओर से बार बार फोटो ग्राफ्स पर फोकस किया जा रहा था। साथ ही क्रास केस मामले से जुडे दस्तावेजों पर बल दिया जा रहा था, लेकिन एसआईटी ने पूरी तैयारी के साथ सिलसिलेवार ढंग से क्राइम सीन से जुडे़ वीडियो क्लिप्स व फोटोग्राफ दाखिल किए तो विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचारों को भी अपनी तफ्तीश में आधार बनाया। जिला जज ने जमानत अर्जी पर फैसला देते समय एफएसएल से आई फोरेंसिक रिपोर्ट को भी फोकस किया जिसमें आरोपियों के कब्जे वाले वैपन की नाल से फायरिंग किए जाने की पुष्टि की गई थी।
आशीष मिश्र का क्रिमिनल इतिहास भी रखा गया
लखीमपुर खीरी। भले ही बचाव पक्ष की ओर से दी गई जमानत अर्जी में आशीष मिश्र मोनू की क्रिमिनल हिस्ट्री न होने की बात कही गई थी लेकिन जांच टीम की रिपोर्ट के बाद तिकुनिया पुलिस ने बताया कि 2005 में आशीष मिश्र मोनू के खिलाफ मुकदमा संख्या 92 अंतर्गत धारा 147,323,504,506,452 आईपीसी दर्ज किया गया था। तो सन 2007 में तिकुनिया थाने मे दूसरा मुकदमा मुकदमा अपराध संख्या 454 अंतर्गत धारा 323,504,506,452 आईपीसी दर्ज किया गया था।
हाईप्रोफाइल मामले के चलते नही हो सकी अन्य सुनवाई
लखीमपुर खीरी। सोमवार को जिला जज अदालत में केस डायरी में 36 से लेकर 48 क्रमांक तक जमानती प्रार्थना पत्रोें की सुनवाई नियत थी। लेकिन इस मामले को लेकर सुनवाई पूरे ढाई घंटे चलती रही। वकीलों और पत्रकारों के अलावा पक्षकार और दल विशेष के लोगों के एकत्रित होने के कारण कोर्ट रूम खचाखच भरा दिखाई दिया। अदालत में लंच के पहले तक केवल आशीष मिश्र मोनू सहित तीन आरोपियेां की जमानत अर्जी पर सुनवाई चली। करीब सवा बजे जिला जज विश्राम कक्ष में गए इसके बाद फैसला लिखाने के सिलसिलें में अन्य जमानत प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई नहीं हो सकी। कई जमानती प्रार्थना पत्र दूसरी अदालत के लिए संदर्भित किए गए तो अधिकतर मामलों में अगली तारीख लग गई।
सीजेएम अदालत ने बढ़ाई तारीख
तिकुनिया कांड की कवरेज के दौरान मारे गए पत्रकार रमन कश्यप के भाई पवन कश्यप की ओर से दी गई रिपोर्ट दर्ज कराने की अर्जी पर सोमवार को भी तिकुनिया पुलिस ने कोई रिपोर्ट नही दाखिल की है, जिसके चलते सीजेएम चिंताराम ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 नवंबर की तिथि नियत की है।
टेनी को आरोपी बनाने पर सुनवाई क्षेत्राधिकार पर संशय
पत्रकार रमन कश्यप की हत्या के मामले में लंबित 156 (3) सीआरपीसी की अर्जी पर भले ही तिकुनिया पुलिस के रिपोर्ट न देने के कारण सुनवाई आगे बढ गई हो लेकिन क्षेत्राधिकार को लेकर सुनवाई पूरी हो पाने में संशय दीख रहा है। क्योंकि आरोपी संख्या दो बनाए गए अजय मिश्र टेनी जो खीरी से सांसद है तथा मौके पर गृह राज्य मंत्री है के खिलाफ मामले की सुनवाई स्पेशल कोर्ट ही कर सकती है। वरिष्ठ अभियेाजन अधिकारी एसपी यादव ने बताया कि एमपीएमएलए कोर्ट को क्षेत्राधिकार है लेकिन परिवादी ने उन्हें सांसद के रूप में नामित नही किया है। फिलहाल रिपोर्ट आने के बाद ही अदालत सुसंगत निर्णय लेगी। तिकुनिया पुलिस को 25 नवंबर तक आख्या देने के लिए आदेशित किया गया है।