धनगढ़ी (नेपाल)। बुधवार से पैदल जाने वालों के लिए नेपाल बॉर्डर खुल गया। बृहस्पतिवार को भारतीय नागरिक पैदल नेपाल जाते दिखे। वहीं जो भारतीय अपने वाहनों के साथ बॉर्डर पहुंचे थे, उन्हें अपने वाहन सीमा पर खड़े करने पड़े, जिससे वहां वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
बृहस्पतिवार को गौरीफंटा-त्रिनगर धनगढ़ी बार्डर से नेपाल जाने वाले भारतीयों को शाम तक लौटने की शर्त पर बिना कोरोना संक्रमण की जांच के जाने दिया गया, जबकि धनगढ़ी के अलावा दूरदराज शहरों व काठमांडू जाने वाले भारतीयों को गाइड लाइन का पालन करते हुए निगेटिव आरटीपीसीआर रिपोर्ट व टीकाकरण प्रमाण पत्र देखने के बाद ही जाने दिया गया।
उधर, एसएसबी गौरीफंटा के सहायक कमांडेंट जगदीश सिंह ने बताया कि बार्डर से नेपाल जाने वाले भारतीयों का पैदल आवागमन जारी है, जबकि निजी दो व चार पहिया वाहनों के लिए पाबंदी है। इस संबंध में अभी उनके पास भी कोई आदेश की प्रति नहीं आई है।
जंगली रास्तों से बढ़ सकते हैं तस्करी के आसार
नेपाल में पैदल भारतीयों के प्रवेश आरटीपीसीआर रिपोर्ट व टीकाकरण प्रमाण पत्र देने के बाद ही होगा। ऐसे में जंगली रास्तों से नेपाल के लिए तस्करी बढ़ने की संभावनाएं हैं। मेन बार्डर से पहले जिस तरीके से आसानी से लोग आवाजाही करते थे उस तरीके से अभी तक नदी घाटों से होकर जा रहे थे।
भारत के अलावा अन्य देशों की भी नहीं हो रही एंट्री
गौरीफंटा बार्डर पर तैनात इमीग्रेशन अधिकारी जयशंकर प्रसाद ने बताया कि भारतीयों के लिए पैदल आवागमन खोला गया है, जबकि अन्य किसी देश के नागरिकों के लिए कोई आदेश नहीं है। इस कारण बीते डेढ़ वर्ष के दौरान अन्य कोई भी देश का इस बार्डर से नागरिक नेपाल नहीं गया है।
रोजाना नेपाल आने-जाने वाले व्यापारियों ने जताई खुशी
धनगढ़ी नेपाल में बर्तन का कारोबार करने वाले पलिया निवासी व्यापारी जयपाल गुप्ता ने बताया कि बार्डर खुलने से पैदल ही सही, लेकिन उनको रोजाना आने-जाने में काफी सहूलियत है। उनका व्यापार भी ठीक ढंग से चल पा रहा है। अब बार्डर पर उनको परेशान नहीं होना पड़ेगा।
धनगढ़ी में बर्तन का कारोबार करने वाले व्यापारी सोमित गुप्ता ने बताया कि 18 माह बाद बार्डर खुलने से अब उनको पलिया रोजाना आने-जाने में आसानी होगी। पहले पलिया अपने घर जाने व दवा आदि लाने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और काफी परेशानियों के बाद वह धनगढ़ी स्थित अपनी दुकान तक आ पाते थे।
बनगवां गौरीफंटा के कपड़ा व्यापारी शांतनु गुप्ता ने कहा कि बार्डर खुलने से उनका व्यापार तो बढ़ेगा ही साथ ही नेपाल में व्यापार की फैली उधारी का तगादा लेने जाने में भी अब ज्यादा दिक्कतें नहीं उठानी पड़ेंगी। जहां तक उसी दिन वापसी की बात है तो वह संभव हो जाती है।
बनगवां निवासी नीरज राना ने बताया कि वह धनगढ़ी में कपड़े की दुकान पर नौकरी करता है। बार्डर खुलने से उसको रोजाना घर बनगवां जाने में अब दिक्कत नहीं होगी। बार्डर बंद होने के दौरान उसको आने-जाने में दिक्कतें आती थीं, जबकि कभी कभार नदी के रास्ते आना-जाना पड़ता था।
धनगढ़ी के मिलन चैक निवासी अमर नागरी ने बताया कि वह गौरीफंटा के बनगवां मंडी में एक दुकान पर नौकरी करता है। बार्डर खुलने से लोगों को आने-जाने में सहूलियत मिलने के साथ ही वहां के बाजार में भी ग्राहकों की आमद बढ़ी है।