शारदा नदी के किनारे बसे बीस गांवों पर मंडराया डूबने का खतरा
बिजुआ। बाढ़ को लेकर डीएम के 72 घंटे के जारी एलर्ट के बीच शारदा नदी के उफनाने से बिजुआ में बाढ़ से बचाव के लिए बनाया गया बांध बह गया। इससे करीब 20 गांवों के लिए खतरा पैदा हो गया है।
उत्तराखंड में बादल फटने के बाद बनबसा डैम से छोड़े गए पानी से शारदा नदी उफना उठी। अचानक आया बाढ़ का पानी शारदा नदी के किनारे बसे गांवों में घुस गया है। ब्लॉक बिजुआ की ग्राम पंचायत बझेड़ा में बाढ़ से बचाव के लिए बनाए गए बांध का करीब 50 मीटर हिस्सा पानी के तेज बहाव में बह गया। इससे करीब बीस गांवों के लिए खतरा पैदा हो गया है। इसमें लौकहा, अकालगढ, रेवतीपुरवा, दुबहा, बझेड़ा, दम्बलटांडा, रैनागंज, रामनगर कलां शामिल हैं।
सिंचाई विभाग बाढ़ खंड ने लाखों रुपये खर्च करके इस बांध का निर्माण कराया था, जिसमें जियोबैग परक्यूपाइन और जाल लगाए गए थे। बंधा लगातार कट रहा है। किनारे के गांवों में लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। हरी भरी फसलों के खेत नदी में समाते जा रहे हैं। बाढ़ खंड के जेई कुंदन लाल और राजेश कुमार पहुंच गए हैं। ग्राम प्रधान चरनपाल सिंह ने बताया कि पहले जो परियोजना बनी थी उसमें नदी किनारे नीचे से ईट सीमेंट और कंक्रीट फाउंडेशन बनाकर ऊपर बांध बनानेे की बात हुुुई थी जिससे नदी नीचे से कटान न कर सके। बाद में उसमें फेेेरबदल कर दिया गया। नदी का पानी नीचे से कटान करता है और जियोबैग आदि ऊपर डाले जा रहे हैं, जिसका कोई फायदा नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है पेड़ के नाम पर केवल पतली डालें तथा पत्ते डाले जा रहे हैं।
जिसे बांध बताया जा रहा है वह नदी के किनारे पानी को रोकने के लिए बनाया गया डौला है। लगातार एक हफ्ते से बचाव कार्य चल रहा है परक्यूपाइन के अंदर जाल लगाकर उसमें पेड़ों की डालें भरकर डौला के किनारे डलवा रहे हैं। जिससे काफी सफलता भी मिली है। नदी का कटान खेतों की तरफ चल रहा गांव को बचाने में सफलता प्राप्त हो गई है।
- सत्यवान वर्मा, जेई सिंचाई विभाग, बाढ़ खंड शारदानगर