धड़कने हुईं तेज, धर्मस्थलों
में मत्था टेक रहे उम्मीदवार
- पिछले चुनाव में धौरहरा में सबसे छोटी तो पलिया में हुई थी सबसे बड़ी जीत
- पलिया के रोमी साहनी ने कांग्रेस को सबसे ज्यादा वोटों के अंतर से दी थी शिकस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
लखीमपुर खीरी। विधानसभा चुनाव के फैसले का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। साथ ही उम्मीदवारों के दिलों की धड़कने भी तेज हो गई हैं। मतदान के प्रतिशत के आधार पर यूं तो सभी उम्मीदवार अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रहे हैं, लेकिन अंदर ही अंदर उन्हें डर भी सता रहा है। इसके चलते वे मंदिर, मस्जिद गुरद्वारों में मत्था टेककर जीत की मनौतियां मान रहे हैं।
उधर, लोगों में जीत हार के अंतर को लेकर भी बहस तेज हो गई है। पिछले चुनाव में पलिया से भाजपा प्रत्याशी रोमी साहनी सर्वाधिक अंतर से चुनाव जीते थे, जबकि धौरहरा से बालाप्रसाद की जीत का अंतर सबसे कम रहा था।
वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा के पक्ष में लहर होने के चलते जिले की आठों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार चुनाव जीते थे। इनमें पलिया विधानसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार रोमी साहनी की जीत का अंतर सबसे बड़ा था। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के सैफ अली नकवी को 69228 वोटों से पराजित किया था। रोमी साहनी को कुल 118069 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के सैफ अली नकवी उनसे आधे से भी कम 48841 वोट पा सके थे। बसपा के डॉ. वीके अग्रवाल 43436 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे।
उधर, धौरहरा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार बाला प्रसाद अवस्थी सबसे कम वोटों के अंतर से चुनाव जीतकर विधायक बने थे। बाला प्रसाद अवस्थी को 79683 वोट मिले थे, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी सपा उम्मीदवार यशपाल चौधरी को 76214 वोट मिले थे। इस तरह बालाप्रसाद अवस्थी की जीत का अंतर महज 3469 वोटों का था। बसपा के शमशेर बहादुर सिंह 54634 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। इस बार यह तीनों उम्मीदवार चुनाव मैदान में नहीं हैं। चुनाव के पहले दलबदल के कारण बाला प्रसाद अवस्थी भाजपा के और शमशेर बहादुर सिंह बसपा के टिकट से हाथ धो बैठे। इस चुनाव में चारों बड़े राजनीतिक दलों ने नए उम्मीदवार उतारे हैं।
अन्य विधानसभा सीटों पर जीत के अंतर पर गौर करें तो निघासन में भाजपा के रामकुमार वर्मा ने सपा के कृष्ण गोपाल पटेल को 46123 वोटों से पछाड़ा था। गोला में भाजपा के अरविंद गिरि ने सपा के विनय तिवारी को 55017 वोटों से शिकस्त दी थी। श्रीनगर में भाजपा की मंजू त्यागी ने सपा की मीरा बानो को 54939 वोटों से हराया था। लखीमपुर सदर सीट पर भाजपा के योगेश वर्मा ने सपा के उत्कर्ष वर्मा को 37748 मतों से मात दी थी। कस्ता में भाजपा के सौरभ सिंह सोनू ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सपा के सुनील कुमार भार्गव उर्फ लाला को 24273 वोटों के अंतर से हराकर जीत हासिल की थी। वहीं मोहम्मदी में भाजपा के लोकेंद्र प्रताप सिंह कांग्रेस के संजय शर्मा को 33918 वोटों से हराकर विधायक बने थे। बसपा के दाउद अहमद तीसरे स्थान पर रहे थे।
वर्ष 2017 में सपा और कांग्रेस मिलकर लड़ीं थीं चुनाव
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी मिलकर चुनाव लड़ी थी। इनमें पलिया में कांग्रेस से सैफ अली खान और मोहम्मदी में कांग्रेस से संजय शर्मा चुनाव लड़े थे, जबकि निघासन में कृष्ण गोपाल पटेल, श्रीनगर में मीरा बानो, धौरहरा में यशपाल चौधरी, लखीमपुर में उत्कर्ष वर्मा और कस्ता में सुनील कुमार भार्गव उर्फ लाला सपा प्रत्याशी थे। पिछले चुनाव में सभी सीटों पर बसपा तीसरे स्थान पर रही थी।
मतगणना से पहले जिलाध्यक्षों ने किए बंपर जीत के दावे
09 एलकेएच 37
मतगणना स्थल पर सुबह से ही एजेंट जुटेंगे। पिछली बार की तरह इस बार भी जीत दोहराएंगे। आठों सीटों पर जीत सुनिश्चित है। इस बार वोट प्रतिशत भी बढ़ेगा।
- सुनील सिंह, जिलाध्यक्ष भाजपा
09 एलकेएच 38
हम लोग ईवीएम की निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन के सहारे नहीं रहना है। जिले की आठों सीटों पर हम अच्छा लड़े हैं। छह सीटों से कम पर जीत नहीं होगी। आठ में छह सीटें हमारी हैं।
- रामपाल सिंह यादव, जिलाध्यक्ष सपा
09 एलकेएच 12
कांग्रेस के साथ हमेशा से किसान और नौजवान रहा है। जनता का जो सहयोग है वह शिरोधार्य है। हम सम्मानजनक स्थित में हैं। भाजपा सरकार की नीतियों से आजिज होकर जनता ने साथ और सहयोग दिया है।
- प्रहलाद पटेल, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
09 एलकेएच 39
बसपा हर स्थिति में मजबूत है। बसपा की सोशल इंजीनियरिंग से सभी वर्ग का वोट मिला है। हम आठ में पांच सीटें जीत रहे हैं। सरकार के खिलाफ जनादेश गया है।
- अजय चौधरी, जिलाध्यक्ष बसपा