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जल निगम की खुदाई ने शहर वालों की मुसीबत बढ़ी

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अस्पताल रोड पर खोदी गई सड़क पर उड़ती धूल।
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सड़कों पर उड़ रही धूल लोगों को दे रही आंख, नाक एवं गले की बीमारियां
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लखीमपुर खीरी। जल निगम पेयजल पाइप लाइन डालने के लिए सड़कों की खोदाई कर रहा है, जो नगरवासियों के लिए मुसीबत बन रही है। खोदी गई सड़क पर वाहन निकलते समय उड़ने वाली धूल से नगरवासी ही नहीं, बल्कि रोड किनारे दुकान लगाने वाले दुकानदार तक परेशान हैं। उड़ती धूल नाक, कान, गला एवं फेफड़ों में संक्रमण का कारण बन रही है। शहरवासियों से लेकर राहगीरों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए न तो जल निगम आगे आ रहा है और न ही नगरपालिका से लेकर जिला प्रशासन।
अमृत मिशन योजना के तहत जलनिगम शहर में पेयजल पाइप लाइन डाल रहा है। पिछले करीब डेढ़ साल से यह काम चल रहा है। इस समय गुरुगोविंद सिंह तिराहे से जीआईसी कॉलेज गेट और वहां से जिला अस्पताल गेट से कुछ पहले तक कुछ दिन पहले ही सड़क खोदकर पाइप लाइन डालकर मिट्टी से ही इसे पाट दिया गया है। ऐसे में पानी आदि का छिड़काव न होने से हवा चलने एवं वाहन निकलने पर दिन भर धूल के गुब्बार उड़ते हैं। इससे नगर वासियों से लेकर जिला एवं महिला अस्पताल जाने वाले मरीज, राहगीर आदि धूल से परेशान हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत सड़क किनारे स्थित दुकानदारों को है। उड़ती धूल ने दुकानदारों का दुकान में बैठना तक मुश्किल कर दिया है। दुकानदारों का कहना है कि दिन में कई कई बार दुकानों में सफाई करनी पड़ रही है। धूल के गुब्बार से काम धाम तक चौपट है। धूल के बीच दिन भर दुकान में बैठने के कारण छींके आने के साथ गले में खराश और आंखों में आंसू तक आने लगे हैं, लेकिन इस समस्या से निजात दिलाने के लिए न तो जलनिगम कुछ कर रहा है और न ही पालिका एवं जिला प्रशासन।
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दुकानदार स्वयं कर रहे पानी का छिड़काव
जलनिगम की अनदेखी से दुकानदार स्वयं पानी का छिड़काव करने के लिए मजबूर हैं। हालांकि नगर पालिका का कहना है कि पानी छिड़काया जा रहा है, जिससे दुकानदारों से लेकर राहगीरों को कोई राहत नहीं मिल रही है। तेज धूप के कारण टैंकर से डाले गए पानी का असर मात्र एक से दो घंटे में खत्म हो जाता है। ऐसे में बेचारे दुकानदार बार बार छिड़काव करने के लिए मजबूर हैं।
रोजी रोटी पर भी पड़ रहा प्रभाव
जिला एवं महिला अस्पताल सहित कचहरी, जेल जाने वाली सड़क की खुदाई होने से सबसे ज्यादा रोज कमाकर खाने वाले प्रभावित हैं। इस रोड पर टैक्सी स्टैंड होने कारण खान पान के तमाम ठेले लगते हैं। ऐसे में सड़क पर उड़ती धूल ने काम धंधा प्रभावित करके रख दिया है। हर समय धूल उड़ने के कारण राहगीर खाने पीने से भी कतरा रहे हैं। यदि खाना खाने के लिए ग्राहक पांच मिनट भी दुकान पर रुक जाय तो उसके वाहन पर धूल की एक मोटी परत छा जाती है।
नाक, कान, गला एवं फेफड़ों में संक्रमण का कारण है धूल
ईएनटी सर्जन डॉ. मनोज शर्मा बताते हैं कि धूल के कण मानव शरीर के लिए बेहद हानिकारक हैं। इससे नाक, कान, गले एवं फेफड़ों में संक्रमण होने की आशंका बढ़ जाती हैं। धूल कण सांस के माध्यम से शरीर में जाकर सांस नली को प्रभावित करते हैं। इससे दमा एवं सांस रोग जैसी खतरनाक बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। उधर, आंखों में धूल जाने से नेत्र रोग होने की की संभावना बढ़ जाती है। वहीं छोटे बच्चों के लिए ये बेहद खतरनाक है।
रेस्टोरेंट मालिका हरविंदर सिंह सनी बताते हैं कि सड़क खोद कर डाल दी, जिसे बनाने का नाम नहीं ले रहे। धूल न उड़े इसके लिए बार बार पानी डलवाते है। फिर भी धूल उड़ने से दुकानदारी प्रभावित है।
शहपुरा कोठी निवासी अमन मेहरोत्रा बताते हैं कि देखो कब तक शहरवासियों को इस धूल धक्कड़ से निजात मिलती है। इस रोड से निकलते समय सांस तक लेना मुश्किल है। इससे संक्रमण होने का खतरा बना रहता है।
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अस्पताल मैनेजर सुष्मिता वर्मा बताती हैं कि काफी दिन से सड़क खुदी पड़ी है। देखो कब तक यह बन पाती है। उड़ती धूल के कारण इस ओर से निकलना मुश्किल हो रहा है।
उड़ती धूल से होने वाली दिक्कत
1. आंख में एलर्जी होना, सूखापन होना,
2. नाक में एलर्जी बढ़ना (ज्यादा छींक आना, नाक बहती रहना, नाक बंद रहना)
3. साइनस की समस्या वाले मरीजों की समस्या बढ़ सकती है।
4. गले में सूखापन, खांसी आना
5. लंबे समय तक धूल में रहने से सांस संबंधी समस्या हो सकती है।
बचाव
1. मास्क लगाए
2. हेल्मेट लगा कर दो पहिया वाहन चलाए।
3. पैदल निकलते समय आंखों पर चश्मा लगाएं।
4. पानी ज्यादा से ज्यादा पीयें।
5. संक्रमण से बचने के लिए घर पहुंचकर गुनगुने पानी में नामक से गरारा करें।
6. सड़क किनारे ठेले पर बिक रहा खुला खाद्य सामग्री न खाएं।
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