बाघ को तलाशने में जुटीं चंपाकली और जयमाला
वन विभाग ने फेंसिंग का प्रस्ताव शासन को भेजा
तिकुनिया। मंझरा पूरब जंगल बाघों का बसेरा बन गया है। ग्रामीणों के मुताबिक कई बाघ जंगल से निकलकर गन्ने के खेतों में छिपकर शिकार कर रहे हैं। मामले में वन विभाग ने फेंसिंग का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है। उधर, वन विभाग की टीमें हथिनी चंपाकली और जयमाला के साथ बाघ के मूवमेंट पर नजर रख रही हैं।
बीती 27 नवंबर को मंझरा पूरब के दुमेड़ा गांव निवासी राममूर्ति को बाघ ने निवाला बनाया था। अब तक राममूर्ति समेत 13 लोगों को बाघ मौत के घाट उतार चुका है। इससे ग्रामीणों में दहशत और गुस्सा है। वन विभाग ने जंगल के बाहर तार फेंसिंग का प्रस्ताव भेजा है। वहीं चंपाकली और जयमाला दोनों हथनियां बाघ के मूवमेंट पर निगाह रखने के लिए सुबह नौ बजे से शाम सात बजे तक वन विभाग के स्टाफ के साथ गश्त पर रहती हैं। हथनियों को मंझरा पूरब गांव में एक मंदिर पर विश्राम दिया जाता है।
इन गांवों को बाघ और हाथियों से बना हुआ है खतरा
मंझरा पूरब और दरलाजपुर की ग्राम पंचायतों के एक दर्जन से अधिक गांवों में बाघ और हाथियों की दहशत है। मंझरा पूरब के ग्राम प्रधान रामपाल और दरलाजपुर के प्रधान जितेंद्र सिंह ने बताया कि खैरेटिया, दुमेड़ा, नानकपुर, परसपुर, औरैया मजरा खुर्द भंगहा, निहालपुर, रामनगर, जम्हौरा, गौढी, सोलापुर और चौधरीपुरवा सहित अन्य गांव शामिल हैं।
लगातार गश्त होने से बाघ का मूवमेंट जंगल में होने का अनुमान है फिर भी गश्त अभियान जारी है। हथिनियों को लगातार 10 घंटे गश्त कराई जा रही है। जंगल के बाहर प्रभावित क्षेत्र में तार फेंसिंग का प्रस्ताव भेजा गया है। बजट आने पर यह काम शुरू होगा।
- विमलेश कुमार, रेंजर, उत्तर निघासन