निर्माण तोड़ने का विरोध करते हुए लोग जेसीबी के आगे लेटे
ग्रामीणों की अधिकारियों से हुई तीखी नोकझोंक, मकान के कागजात भी नहीं देखे
संपूर्णानगर। बसही कॉलोनी में अवैध रूप से रहने वाले लोगों को वहां से हटाने के लिए वन विभाग की टीम ने मंगलवार को अभियान चलाया। बताया जाता है कि ये लोग वन विभाग की भूमि पर 1962 से काबिज चले आ हैं। कई बार नोटिस देने के बाद भी उन्होंने जगह खाली नहीं की थी। पक्के निर्माण तोड़े जाने के दौरान लोगों की वन विभाग के अधिकारियों से नोकझोंक भी हुई।
बसही कॉलोनी में करीब 78 ग्रामीणों के यहां पर घर है। मंगलवार को वन रेंजर शिव बाबू सरोज, एसडीओ आरपी रौतेला समेत भारी संख्या में वन विभाग की टीम तहसीलदार आशीष कुमार सिंह, सीओ आदित्य कुमार व भारी पुलिस बल के साथ गांव पहुंची। यहां शुरूआत में दो मुर्गी फार्म की टिन शेड गिराए गए। वर्ष 2019 में बने सरकारी शौचालय को भी गिरवा दिया गया। इस पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई।
भाजपा मंडल अध्यक्ष के पिता और दो चाचा के नाम यहां पट्टा है। टीम उस निर्माण को भी गिराने पहुंच गई। इसके बाद राजेश सिंह और अखिलेश सिंह अपने मकानों के सामने लेट गए और मकान संबंधी कागज भी दिखाए। कागज दिखाने के बाद नपाई हुई, लेकिन टीम ने चार पिलर छोड़कर आगे की दीवार वन विभाग की जमीन पर होना बताया। इसके बाद ग्रामीणों की घेराबंदी करने के बाद दूसरी तरफ से जेसीबी चलाकर दीवार गिरा दी गई। कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों में दहशत फैली रही और बाजार में भी सन्नाटा पसरा रहा।
27 हेक्टेअर भूमि वन आरक्षित है, इस पर वर्षों से कब्जा है। पूर्व में नोटिस देकर अवगत कराया गया और प्रधान को भी नोटिस दिए गए। बावजूद इसके कब्जा नहीं हटाया गया। इस भूमि पर 25 हेक्टेयर में वन विभाग ने कब्जा छुड़ाकर मजदूरों से गड्ढे करवाकर जल्द पौधे लगवाएगी, जबकि कुछ मकान बने हैं उन्हें तोड़ने से रोका गया है, इन्हें कुछ समय दिया जाएगा ताकि वह लोग खुद कब्जा हटा लें।
- शिवबाबू सरोज, रेंजर संपूर्णानगर
ग्रामीण बोले- 1962 से हैं बसे, नहीं मिला कोई नोटिस
बसही निवासी भूपेंद्र, शंकर, भुट्टो, संजय सिंह, रामशंकर सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि हमें किसी प्रकार का कोई नोटिस नहीं मिला है। वर्षों से हम यहीं बसे हैं। निर्माण कराया है। तीन वर्ष पहले सरकारी शौचालय मिला है। अगर अवैध जमीन पर बसे हैं तो सरकार ने कैसे हमें शौचालय दे दिया। वन विभाग पर आरोप है कि आए दिन कब्जे के नाम पर वन कर्मी पैसे तक की वसूली करते हैं।
पक्का मकान गिरा तो निकल आए आंसू
आंखों के सामने शौचालय और पक्का निर्माण गिरते देखकर महिलाओं के साथ ही बच्चों की भी आंखों से आंसू निकल आए। कहा कि अब हम कहां जाएंगे, कोई ठिकाना नहीं है। 1962 में यहां आए थे। एक-एक रुपया जोड़कर घर बनाया था, सब पलभर में चकनाचूर हो गया।
ग्रामीणों ने वन विभाग के नोटिस पर जताई नाराजगी
पलियाकलां। मंगलवार को अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर तले बड़ी संख्या में ग्रामीण तहसील पहुंचे और एसडीएम डॉ. अमरेश कुमार को ज्ञापन दिया।
ज्ञापन में कहा गया है कि वन विभाग द्वारा जमीनों को खाली करने का नोटिस दिया जा रहा है, जबकि वन अधिनियम 2006 और भाजपा की पिछली सरकारों ने पुश्तों से बसे लोगों को जमीन पर अधिकार देने के लिए सर्वे कराया था। अब उस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय जमीन खाली करने का नोटिस दिया जा रहा है।
मामले में वन अधिनियम 2006 के तहत सर्वे कर जमीन का मालिकाना हक दिलाने, भूदान में सरकार द्वारा दी गई तबादले की जमीन (जिसका लगान दिया जा रहा है) उनसे जमीन खाली न कराने, जंगल के किनारे कई पीढ़ियों से बसे परिवारों को उजाड़ने के बजाए मालिकाना हक दिलाने की मांग की गई है। इस दौरान किसान महासभा के कमलेश राय, लल्लन प्रसाद गौड़, शंकर प्रजापति, इंदल, जानकी प्रसाद, रंगीलाल, जेटली, ओमप्रकाश, संजय, शिवनाथ, सुदर्शन, राजकुमारी, मुन्नी देवी, रामविलास आदि मौजूद रहे। संवाद